सीतामढ़ी। लगन का सीजन थोड़ा नरम पड़ा तो चुनावी सीजन गरमाने लगा है। लोकसभा चुनाव का शंखनाद होते ही बाजारों से लेकर गावों के गलियों तक राजनीति अखाड़ा सज चुका है। कोनिया क्षेत्र की राजनीतिक राजधानी कोइरौना बाजार मानी जाती है। वैसे तो समय के साथ इस बाजार का विस्तारीकरण और विकास नही हो पाया, लेकिन राजनीति अखाड़े के रूप में यह बाजार नेतागीरी में नंबर वन गिना जाता है।
शुक्रवार को तखत पर पालथी मार कर बैठे कड़क कुर्ता पायजामा ऊपर से चमकदार सदरी और चुटकी से मूंछों को टाइट करते एक नेता जी के मुंह से निकला कि अबकी बार फिर हमारी सरकार ? नेता जी के मुंह से यह बात निकलते ही अन्य पार्टी के नेताओं ने उनकी बोलती ही बंद कर दी। शाम तक इस बाजार में कोनिया से अठगवां तक के नेता क्षेत्र से लेकर देश की राजनीति करते नजर आते है। कई नेता तो जुबानी पासा फेंकने में ऐसे माहिर है कि बड़े से बड़ा राजनीति विशेषज्ञ का दिमाग भी चकरघिन्नी खा जाए। कुछ नेता पूरे देश मे किस पार्टी को कितनी सीट मिलेगी चुटकी बजा बता देने में माहिर हैं।
भदोही से किसी भी पार्टी के प्रत्याशी की घोषणा न होना इन नेताओ को जैसे खाए जा रहा है। चाय पान की दुकानों पर सियासी तमासा का नजारा बखूबी दिखने लगा है। बाजार में नेताओ के जमावड़े के कई अड्डे सजते है। धनवंतरि क्लिनिक, दामोदर पेड़ा वाले, बाबा चाय वाले, राम सिंह चाय-पान की दुकान हो या डमरू चाय वाले और अनिल की पान शाप और गंगा पार वाले गोली चाय पान की दुकान पर सुबह से शाम तक राजनीतिक अखाड़ा सजता है। इन दुकानों पर विश्लेषकों और नेताओं में विभिन्न मुद्दों को लेकर रायसुमारी से लेकर जीत हार के दावे और विकास कार्यों को गिनाने का दौर चल रहा है।