भदोही। अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) और भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) द्वारा भदोही के कालीनों को मिले भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) के दर्जे पर संयुक्त बैठक संस्थान के पिपरिस कैंपस में हुई। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि जीआई टैग के लाभ के लिए निर्माता प्रस्ताव बनाकर दें तो उस पर शासन से विचार संभव है। बैठक में कालीन निर्यातकों ने जीआई टैग के लाभ के लिए सरकार से अनुदान की मांग की। वर्षों पूर्व मिले जीआई टैग का क्रियान्वयन शुरू नहीं होने पर लोगों ने चिंता व्यक्त की।
एकमा के संयुक्त मानद सचिव, आलोक बरनवाल ने कहा कि भदोही के कालीन पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। यह हर कोई जानता है कि भारत में कालीन निर्माण भदोही से प्रारंभ हुआ। यही कारण है कि भदोही के कालीन शिल्प का लोहा पूरी दुनिया मानती हैं। हमारे कालीनों को भौगोलिक संकेतक के रूप में मान्यता मिलना एकमा और यहां के बुनकरों के लिए गौरव की बात है। एकमा उपाध्यक्ष अब्दुल हादी अंसारी ने कहा कि भौगोलिक संकेतक का दर्जा मिले कई वर्ष हो गए। इसका लाभ उठाने के लिए आवश्यक है कि इसका प्रचार प्रसार पूरी दुनिया में हो। और यह काम केवल भारत सरकार कर सकती है। उन्होंने भारत सरकार से इसके लिए 5 प्रतिशत अनुदान मांगा। हाजी शाहिद हुसैन अंसारी ने डोमोटेक्स समेत अन्य अंतराष्ट्रीय कालीन मेलों में भी इसक प्रचार प्रसार कराने की मांग की गई।
बैठक में अन्य निर्यातकों ने भारत सरकार वाणिज्य मंत्रालय द्वारा ड्राबैक दरें घटाने से हो रहे नुकसान की बात भी उठाई। बैठक में उपायुक्त उद्योग हरेंद्र प्रताप, डा.एसके पांडेय, मुमताज अंसारी, एकमाध्यक्ष ओएन मिश्र, पियूष बरनवाल, रवि पाटोदिया, सुजीत बरनवाल, जेपी गुप्ता, हृदय नारायण मौर्य, शाहिद अंसारी आदि ने विचार व्यक्त किए।