सीतामढ़ी। कोनिया के गजाधरपुर कला तुलसी गांव में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन रविवार को पर विविध धार्मिक कार्यक्रमो से पूरा क्षेत्र भक्तिरस में सराबोर हो गया। वृंदावन से पधारे कथा वाचक डॉ. रिपुसुदन जी ने कहा कि भागवत की कथा जन-जन को जोड़ने में और समरसता स्थापित करने में सर्वोपरि महापुराण है। कहा कि भागवत कथा कलिकाल के लिए साक्षात कल्पबृक्ष है। इसका जो आश्रय ग्रहण करता है उसकी समस्त कामनाएं पूर्ण होती है। प्रद्युम्न जन्म और सुदामा चरित्र की कथा सुना कर भागवत भक्तो को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुदामा चरित्र की भावपूर्ण कथा सुनाते हुए कहा की जिसकी मदद कोई नही करता उसकी मदद साक्षात करुणा के सागर करते है। मौके पर पंडित रामयत्न शुक्ल, आचार्य हरे कृष्ण जी महराज, डॉ. रामाश्रय शुक्ल, छोटेलाल शुक्ला, श्रीकांत शुक्ल, रामजी शुक्ल, भोला नाथ ,वकील शुक्ल, चक्रधर शुक्ला आदि रहे।