सीतामढ़ी। देववाणी संस्कृत के मूर्धन्य विद्वान एवं काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर रामयत्न शुक्ल ने कहा कि संस्कृत पढ़ने वालों को आरक्षण मिलना चाहिए, क्योकि संस्कृत पढ़ने वालों की संख्या कम है।
पैतृक गांव कोनिया के कला तुलसी गांव में एक धार्मिक कार्यक्रम में पधारे श्री शुक्ल ने रविवार को अमर उजाला से खास बातचीत की। एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि बच्चों में संस्कार और अनुशासन के लिए संस्कृत की पढ़ाई प्राइमरी से ही जरूरी है, इसके लिए वे शीघ्र ही महामहिम राष्ट्रपति से मिलकर संस्कृत के उत्थान और इसकी शिक्षा प्राइमरी से ही शुरू करने के लिए अपना सुझाव देंगे। कहा कि संस्कृत भाषा का उद्देश्य सर्वे भवन्तु सुखिन: .है। इसे सभी को अपनाना चाहिए। कहा कि संस्कृत भाषा कुछ उपेक्षित जरूर है। राष्ट्रपति पुरस्कार, विश्व भारती पुरस्कार, करपात्र रत्न पुरस्कार, बिरला फाउंडेशन सहित अनेक पुरस्कारों से विभूषित श्री शुक्ला ने कहा कि उनकी इच्छा है कि जनपद के कोनिया क्षेत्र में गुरुकुल पद्धति के संस्कृत विद्यालय की स्थापना हो इसके लिए वे प्रयास रत है।