ज्ञानपुर/लालानगर। तालाबों के संरक्षण और सुंदरीकरण को लेकर जहां अदालतें संजीदा हैं, वहीं प्रशासनिक मशीनरी उन्हें अतिक्रमण से मुक्त नहीं करवा पा रही। यही वजह है कि क्षेत्र के ज्यादातर तालाबों पर कब्जा है। कहीं पाटकर घर बना लिया गया है तो कहीं पर तालाब की जमीन में खेती होने लगी है। कोर्ट का निर्देश है कि तालाबों से अतिक्रमण हटाया जाए। बावजूद इसके तालाब पर किसी अधिकारी की निगाह नहीं पहुंच रही है। चकरोड भी अतिक्रमण के शिकार हैं।
ज्ञानपुर विकासखंड के पूरे झम्मन गांव स्थित एक बीघे से ज्यादा रकबे का तालाब अतिक्रमण के कारण अस्तित्व खोता जा रहा है। तालाब पर पास पड़ोस के लोग कूड़ा और मिट्टी फेंककर पाटते जा रहे हैं। सूत्रों की माने तो सन 2008 में मनरेगा के तहत मजदूरों को लगवाकर तालाब की खुदाई और साफ-सफाई करवाने के बाद आज तक ग्राम प्रधान समेत किसी अधिकारी ने तालाब की तरफ मुड़कर नहीं देखा। मौजूदा हालात यह है कि अगर शीघ्र ही तालाब की तरफ प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान नहीं पहुंचा तो तालाब अपना अस्तित्व पूरी तरह खो देगा। तालाब को तेजी से पाटकर निजी उपयोग में लिया जा रहा है। बता दें कि तालाब के बगल में ही चौरा माता मंदिर भी मौजूद है। उक्त मामले में गांव के ही रवींद्र, जयशंकर, राजेश, संजय, शिव भोले, पिंटू, जयराम समेत ग्रामीणों ने तालाब के खोते अस्तित्व को वापस लाने और बगल में स्थित पंचायत भवन की जमीन पर भी किए गए क़ब्जे को हटवाने की मांग की है। इसी तरह, डुहिया भावसिंहपुर में भी तालाब और चकरोड पर अतिक्रमण कर लिया गया है। गांव के सभाशंकर पांडेय जिलाधिकारी को पत्र देकर तालाब के 105 नंबर आराजी पर कुछ लोगों के अतिक्रमण करने का आरोप लगाया है। कहा कि तालाब की जमीन पर घर बन गया है। चकरोड की जमीन पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया गया है।