ज्ञानपुर। तालाब को कृषि भूमि बताकर ढाई दशक पूर्व हुए पट्टे एडीएम न्यायिक बच्चीलाल के कोर्ट ने निरस्त कर जमीन को तालाब की श्रेणी में अंकित करने का आदेश दिया है। अभोली के हरिकरनपुर गांव में हुए इस फर्जीवाड़े में प्रधान समेत कई लोगों पर जालसाजी का मुकदमा पूर्व में ही दर्ज हो चुका है। दो माह पूर्व एसडीएम भदोही ने पट्टे निरस्त करने की संस्तुति की थी।
तालाबों, चारागाहों और सरकारी भूमि से अवैध कब्जा हटाने के लिए शासन से लेकर प्रशासन की ओर से तमाम दावे हो रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे विपरित है। राजस्व विभाग की लापरवाही से गांवों में तालाबों पर मनमाने ढंग से कब्जा किया जा रहा है। करीब आठ माह पूर्व हरिकरनपुर के ग्रामीणों ने आईजीआरएस पर शिकायत की थी कि गांव में तालाब की नवैयत बदलकर अवैध तरीके से 14 लोगों को पट्टे आवंटित कर दिए गए। डीएम के निर्देश पर की गई जांच के बाद एसडीएम ने पाया कि आराजी संख्या 431 रकबा नंबर 1.594 राजस्व अभिलेख में तालाब अंकित था। 22 फरवरी 1996 को एक बड़े रकबे पर 14 लोगों के लिए कृषि पट्टे कर दिए गए। नियमानुसार तालाब की जमीन पर पट्टा नहीं होने चाहिए। एसडीएम ने पट्टा निरस्त करने की आख्या अपर जिलाधिकारी के पास भेजी थी। पांच सितंबर 2017 को पट्टा पाने वाले चिंतामणि पुत्र मुरली, छोटेलाल पुत्र दूधनाथ, दुलारे पुत्र रामलाल, पत्ती देवी, बलिराम, मुकुंद समेत 14 लोगों ने एडीएम कोर्ट में आपत्ति दाखिल किया। जिसमें कहा कि वह एससी जाति के व्यक्ति हैं। भूमि प्रबंध समिति और उच्चाधिकारियों की देखरेख में उन्हें पट्टा मिला। आवंटित भूमि के अलावा उनके पास कोई भूमि नहीं है। विद्वान अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद एडीएम न्यायिक बच्ची लाल ने हाईकोर्ट में बजरंगी पांडेय बनाम ज्ञानदत्ता के फैसले को स्पष्ट करते हुए सभी 14 लोगों का पट्टा निरस्त कर उक्त भूमि को तालाब में अंकित करने का निर्देश दिया।