ज्ञानपुर (भदोही)।
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी किसान ऋण मोचन योजना में जमीनी स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। सत्यापन को लेकर लेखपाल संजीदा नहीं है। घर और दूकानों पर बैठकर ही सत्यापन किया जा रहा है। इससे पात्र होने के बाद भी कई किसानों को ऋणमाफी के दायरे से बाहर कर दिया गया। पहले चरण में सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर 2880 किसानों का आवेदन निरस्त हो चुका है।
सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद एक लाख तक कर्ज लेने वाले किसानों की कर्जमाफी की कवायद शुरू हुई। शासन से तय गाइड लाइन के हिसाब से बैंकों और प्रशासन ने करीब एक माह कड़ी मेहनत कर 22 हजार किसानों को लाभान्वित करने की सूची बनाई। सत्यापन के लिए हल्का लेखपाल को जिम्मेदारी सौंपी गई। सत्यापन के दौरान लेखपालों ने जमकर मनमानी की। आधे-अधूरे सत्यापन से कई किसान कर्जमाफी का लाभ नहीं पा सकेंगे। सूत्र बताते हैं कि ग्रामीण अंचलों में सत्यापन करने के नाम पर खानापूर्ति की गई। बिना जांच-पड़ताल के आवेदनों पर रिपोर्ट लगा दिया। पहले चरण में कर्जमाफी का लाभ देने के दौरान ढाई हजार से अधिक लोगों का आवेदन निरस्त हो गया। नोडल अधिकारी एवं उप निदेशक कृषि अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि सत्यापन वाले अभिलेखों की गहनता से जांच की जा रही है। जिन आवेदनों को संदिग्ध समझा जा रहा है, उसकी दुबारा जांच हो रही है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी।