ज्ञानपुर। जिले में नलकूपों की 350 किमी नालियां ध्वस्त हो चुकी हैं। इससे 10 हजार हेक्टेयर खेत की सिंचाई प्रभावित हो रही है। रोपाई और सिंचाई के लिए किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। किसान निजी साधनों से सिंचाई करते हैं। इससे उनको आर्थिक रूप से नुकसान होता है।
बारिश के अलावा नहर और राजकीय नलकूप सिंचाई के मुख्य साधन हैं। खरीफ-रबी और जायद सीजन में किसान धान, गेहूं, तिलहन, दलहन संग सब्जी आदि की खेती करते हैं। जिले में सिंचाई के लिए 518 नलकूप, छह रजबाहा, 12 माइनर और एक मुख्य नहर है। नलकूपों से खेत तक पानी पहुंचाने के लिए 650 किमी नाली बनाई गई है। जिससे करीब 15 हजार हेक्टेयर की सिंचाई होती है। खेतों तक पानी पहुंचने के लिए नहरों से एक दशक पूर्व 700 से अधिक नालियां बनाई गईं थीं। मरम्मत न होने से अधिकतर नालियां टूट चुकी हैं। कुछ जगह अतिक्रमण के कारण ध्वस्त हो चुकी हैं।
518 राजकीय नलकूपों पर 10 हजार हेक्टेयर की खेती निर्भर है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक नलकूप से खेत तक पानी पहुंचाने के लिए प्रत्येक नलकूप से एक से डेढ़ किमी लंबी नाली बनाई गई है। नाली बीच-बीच में टूटकर खराब हो चुकी है। इससे किसानों के रकबे तक पानी नहीं पहुंच पाता है। नलकूप के आसपास ही खेतों की सिंचाई हो पाती है। तहसील औराई, ज्ञानपुर, भदोही में राजस्व विभाग की ओर से नालियों को खेत तक पहुंचाने के लिए सीमांकन किया गया लेकिन ठेकेदारों के धांधली के कारण लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। डीघ ब्लॉक के दरवांसी राजकीय नलकूप संख्या प्रथम की नाली पूरी तरह से टूट चुकी है। नलकूप तो चल रहा है, लेकिन पानी खेतों तक पानी पहुुंचा रहा है। यही स्थिति ज्ञानपुर के लखनों में भी है।
किसानों को खेती के लिए खरीदनी पड़ती है पानी
जर्जर नालियों और बदहाल नलकूपों का खामियाजा किसानों को चुकानी पड़ती है। खेत की जरूरतों को पूरा करने के लिए किसानों को निजी पंपिंग सेटों के सहारे सिंचाई करनी पड़ती है। निजी पंपिंग सेट के मालिक एक घंटे का 50 से 60 चार्ज करते हैं। जनरेटर से पंपिंग सेट चलाने पर मालिक किसानों से 130 से 150 रुपये प्रतिघंटा वसूलते हैं।
एक नजर में नलकूपों की हालत
कुल नलकूप 518
तकनीकि खराबी के कारण बंद नलकूप चार
विद्युत कनेक्शन न होने के कारण बंद नलकूप छह
नाली की लंबाई करीब 650 किमी
जीर्ण-शीर्ण नाली 350 किमी
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वर्जन
वित्तीय वर्ष 2023 में 40 नलकूपों की नालियों को दुरूस्त किया गया। 2024 के लिए प्रस्ताव बनाया जा रहा है। बजट की स्वीकृति मिलने पर नालियों की मरम्मत कराई जाएगी- संजय भारती, अधिशासी अभियंता नलकूप
क्या बोले किसान-
- नालियां टूटने से आवंटित क्षेत्र में सिंचाई नहीं हो पाती है। नलकूप के आसपास की खेती ही सिंचित हो पाती है। निजी नलकूप या पंपिगसेट से 50 से 125 रूपये प्रति घंटे भराई देनी पड़ती है। - कोको दूबे
- नाली सही न होने से पानी बगीचे में चला जाता है। पूर्व में कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक सुधार नहीं हो सका। नाली बनने से आसपास की कई बीघे फसलों की सिंचाई होती- राकेश कुमार गौतम