बैंक से कर्ज लेकर खेती करने वाले जिले के 35 हजार किसानों पर इस बार दोहरी मार पड़ी है। एक तो बैंक से लिए गए ऋण को चुकता करने की चिंता, दूसरे ओलावृष्टि के रूप में प्रकृति के कोप से लगभग 50 फीसदी फसल गंवा चुके मेहनतकशों की पेशानी पर बल ला दिया है। एक सीजन की प्राकृतिक आपदा के चलते आने वाले कई महीनों तक दाल-रोटी की मुश्किलें खड़ी होने वाली हैं।
कृषि प्रधान देश में किसानों को बेहतर खेती करने के लिए केंद्र सरकार कई योजनाएं चला रही है। कृषि यंत्र, बीज समेत अन्य लाभ अनुदानित रूप से मिलता है। इसी के तहत आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को सरकार किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिए बैंकों से कर्ज दिया जाता है। एक साल के अंदर किसान कर्ज जमा कर देते हैं तो उन्हें मात्र चार प्रतिशत ब्याज देना पड़ता है। एक साल से अधिक समय होने पर सात और दो साल से अधिक समय गुजरने पर 14 प्रतिशत ब्याज लिया जाता है। एक साल के बाद सरकार यह मान लेती है कि संबंधित कृषक खेती के बजाए किसी अन्य कार्य में पैसे को लगा रहा है। पिछले दो साल से बेमौसम बारिश, सूखा और ओेलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि ने दो साल पूर्व बैंक से कर्ज लेने वाले 35 हजार किसानों के सामने संकट पैदा कर दिया है। मौसम की मार सह रहे किसान बैंक से लिए कर्ज को जमा करने में अक्षम हो रहे हैं।