सीतामढ़ी। क्षेत्र के कूड़ीखुर्द गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ में पांचवें दिन कथा व्यास हरिकृष्ण महराज ने श्रीकृष्ण लीला का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रोताओं को प्रेम, वात्सल्य और भक्तिरस की ज्ञानगंगा में गोते लगवाए।
कहा कि कन्हैया जैसी लीला मनुष्य क्या कोई देव भी नहीं कर सकता। लीला और क्रिया में अंतर होता है भगवान ने लीला की है। जैसे जिसको कर्तव्य का अभिमान और सुखी रहने की इच्छा हो तो वह क्रिया कहलाती है, जिसको न तो कर्तव्य का अभिमान है और न ही सुखी रहने की इच्छा हो। बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला की, जिससे सभी गोकुलवासी सुखी थे। उन्होंने कहा कि माखन चोरी का रहस्य मन की चोरी से है। कन्हैया ने अपने भक्तों के मन की चोरी की है। इस प्रकार उन्होंने बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन करते हुए श्रोताओं को वात्सल्य प्रेम में सराबोर कर दिया। पूतना वध, गोवर्धन लीला,और रासलीला का वर्णन सुनाकर उपस्थित श्रद्धालुओं को कृष्ण रस में सराबोर कर दिया। इस मौके पर भजन, प्रभु संकीर्तन, आरती आदि से पूरा क्षेत्र भक्ति रस में सराबोर रहा।