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सीमावर्ती इलाकों में खुलेआम चल रही शराब की अवैध फैक्ट्री

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ज्ञानपुर। भदोही जिले में एक दशक में जहरीली शराब से 11 लोगों की मौत के बाद भी अवैध शराब का कारोबार थम नहीं रहा है। घटनाएं होने के बाद महकमा सक्रिय तो होता है, लेकिन चंद दिनों में ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है। आबकारी विभाग के अधिकारियों और खाकी के तालमेल से अवैध शराब बनाकर तस्करी की जा रही है। यूपी के सहारनपुर और उत्तराखंड में दो दिन के अंदर 30 से अधिक लोगों की जहरीली शराब से मौत के बाद आबकारी विभाग अलर्ट हो गया है।
ग्रामीण अंचलों में अवैध शराब बनाने और बेचने का धंधा जोरों पर चल रहा है, जो कभी-कभी जानलेवा बन जाता है। सुरियावां के अभियां, नई बाजार और औराई के मेदनीपुर में यह कारोबार बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। तीनों ही इलाका सीमावर्ती होने से मिर्जापुर, जौनपुर, इलाहाबाद जिले से घिरा होने से तस्कर खिसक लेते हैं।
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वर्ष 2008-09 में चौरी इलाके में जहरीली शराब पीने से सात लोगों की जान चली गई थी तो 2012 में बभनौटी गांव के पास चार को जान गंवानी पड़ी थी। तस्करों के लिए सेफजोन बने औराई इलाके में शराब ही नहीं गांजे, अफीम तक की तस्करी की जाती है। अक्सर क्राइम ब्रांच और स्वाट टीम की छापेमारी में अवैध शराब का जखीरा बरामद होता रहता है, लेकिन तस्कर शांत नहीं बैठते। खाकी और आबकारी की शह पर कारोबार फिर से शुरू हो जाता है। जब कहीं जहरीली शराब पीने से मौत की घटना होती है तो छापेमारी के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। अब उत्तराखंड समेत सूबे के सहारनपुर, कुशीनगर आदि जिलों में दो दिन के अंदर 30 से अधिक लोगों की जान जहरीली शराब पीने से चली गई। इस घटना के बाद सरकार ने जिले को अलर्ट कर दिया। जिला आबकारी अधिकारी आरपी सिंह चौहान ने कहा कि सहारनपुर की घटना के मद्देनजर टीमों को अलर्ट किया गया है। छापेमारी कर अवैध फैक्ट्रियों को बंद कराया जाएगा।
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