ज्ञानपुर। ठंड के सीजन में दोहरे मानसून ने किसानों संग कृषि विशेषज्ञों की बेचैनी बढ़ा दी है। लगातार बढ़े तापमान से गेहूं की पैदावार घटने की आशंका से किसान चिंतित हो उठे हैं। एक से दो डिग्री तापमान से भी 10 से 15 हजार एमटी पैदावार प्रभावित हो जाती है।
कृषि प्रधान देश में ज्यादातर खेतीबाड़ी मानसून पर ही निर्भर रहती है। जिले में 62 हजार हेक्टेअर के सापेक्ष 54 हजार हेक्टेअर में गेहूं की बुआई की गई है। गेहूं की फसल के लिए कम से कम 15 से 18 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। दिसंबर के बाद जनवरी में रात के समय तो तापमान आठ से नौ डिग्री तक रहता है लेकिन दिन में यह 22 से 24 डिग्री तक पहुंच जा रहा है। तीखी धूप होने से भी गेहूं की फसल प्रभावित होना तय माना जा रहा है। इस सीजन में कोहरे संग आसमान में बादल रहने से तापमान फसल के मुफीद होता है लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। जिससे गेहूं की फसल या तो पीली हो जा रही है या विकसित नहीं हो पा रही। करीब दो माह का समय गुजर चुका है लेकिन अब भी एक फीट से अधिक गेहूं की फसल नहीं हो सकी है। कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो जिले में 62 हजार के सापेक्ष 54 हजार हेक्टेअर में गेहूं की बुआई की गई है। जिसमें एक लाख 50 हजार एमटी पैदावार का लक्ष्य है, हालांकि जिस तरीके से मानसून की बेरुखी है, उससे पैदावार प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि गेहूं की फसल के लिए तापमान काफी महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में तापमान अधिक प्रभावित नहीं करेगा हालांकि फरवरी में इसका असर दिखेगा। अगर फरवरी में यही स्थिति बनी रही तो पैदावार 10 फीसद तक प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि फरवरी में गेहूं की फसल में दाने आते हैं, उस दौरान तापमान 15 से 18 डिग्री के आसपास रहना चाहिए।