ज्ञानपुर। बीमार एवं घायलों को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाने वाली एंबुलेंस खुद ही बीमार हो चुकी है। स्वास्थ्य और परिवहन विभाग की उदासीनता से अनफिट एंबुलेंस में ही मरीजों को ढोया जा रहा है। इससे कभी भी किसी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता। परिवहन विभाग ने ऐसे एंबुलेंस संचालकों को नोटिस जारी किया है। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार गंभीर है। सरकारी 102, 108 और निजी एंबुलेंसों से गर्भवती, घायल, बीमार व्यक्तियों को निजी और सरकारी अस्पतालों में पहुंचाया जाता है। कुछ साल पूर्व आई एंबुलेंसों का फिटनेस फेल हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग से लेकर निजी संचालक ऐसे एंबुलेंस के फिटनेस को लेकर गंभीर नहीं है। घटनाओं के बाद ही परिवहन और स्वास्थ्य विभाग की नींद खुलती है। बिना फिटनेस सही कराए ही एंबुलेंस लेकर चालक दौड़ रहे हैं। अभी जिन एंबुलेंस का फिटनेस फेल है, संभागीय परिवहन विभाग भी ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। कई तो ऐसे वाहन हैं जिनका पंजीकरण नहीं है, इसके बावजूद एंबुलेंस के रूप में चल रहे हैं। परिवहन कार्यालय में निजी और सरकारी कुल 58 एंबुलेंस पंजीकृत हैं। इनमें 29 का फिटनेस फेल है। इसमें स्वास्थ्य विभाग की 11 और निजी 18 शामिल है। किसी का एक तो किसी का दो महीने से फिटनेस नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार विभाग के पास 41 एंबुलेंस है। इनमें 108 की 18 और 102 की 20 एंबुलेंस है जबकि तीन एंबुलेंस एयरलेंस है। सीएमओ डॉ. संतोष कुमार चक ने कहा कि सरकारी एंबुलेंस का फिटनेस लखनऊ से ही बनकर आता है। कोई भी खराबी हाने पर मिर्जापुर, वाराणसी, जौनपुर, प्रयागराज के वर्कशाप में भेजकर तत्काल मरम्मत कराई जाती है।