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सड़कों पर फिर सक्रिय हुए डग्गामार वाहन चालक, विभाग बेखबर

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ज्ञानपुर। जिले में मासूमों की जान लेने वाली एक के बाद एक घटनाओं के बावजूद न तो प्रशासन सबक लेना चाहता है ना ही स्कूल प्रबंधन। कई साल पुराने डग्गामार वाहनों में स्कूली बच्चों को ढोकर ले जाते हुए सड़कों पर आसानी से देखा जा सकता है। विभाग के रिकार्ड में केवल 302 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं, लेकिन जिले में इसके ढाई गुने से भी अधिक स्कूली वाहन प्रतिदिन बच्चों की जिंदगी जोखिम में डालते हैं।
औराई क्षेत्र के कैयरमऊ में आठ बच्चों की मौत का हादसा और गत 12 जनवरी को लखनो में आठ सीटर वैन में 19 बच्चों को ठूंसकर जान सांसत में डाल देने वाली घटनाएं शायद जिला प्रशासन भूल गया। स्कूली बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऑटो और मैजिक में छोटे बच्चों को मनमाने ढंग से बैठाकर वाहन चालक फिर फर्राटा भरने लगे हैं। परिवहन और शिक्षा विभाग इस लापरवाही से बेखबर हैं।
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लखनो हादसे के बाद अधिकारियों की सक्रियता के बाद डग्गामार वाहन चालक सड़कों पर दिखना कम हो गए थे। लेकिन महीनेभर बाद ही विभाग की सुस्ती से डग्गामार वाहन चालकों का हौसला बुलंद हो गया है। परिवहन विभाग के मुताबिक जिले में 12 सीटर के ऊपर 210 वाहनों का रजिस्ट्रेशन है। वहीं 8 से 12 सीटर में 92 वाहनों का रजिस्ट्रेशन स्टॉफ के लिए है। लेकिन स्टॉफ वाहनों का रजिस्ट्रेशन कराकर विद्यालय संचालक उसमें नौनिहालों को ढो रहे हैं।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी सत्येंद्र कुमार यादव ने बताया कि बोर्ड परीक्षा के चलते समस्या न हो, इसलिए डग्गामार वाहनों की चेकिंग में कुछ कमी की गई है। मानक के विपरीत बच्चों को ढोने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पिछले महीने चौरी में तीन डग्गामार मैजिक का चलान किया गया था। वहीं डिलीवरी वाहन के रजिस्ट्रेशन पर सीट लगाकर बच्चों को ढोने वाली एक मैजिक को सीज किया जा चुका है।
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चोरी-छिपे संचालित हो रहे सील स्कूल
ज्ञानपुर। लखनो स्कूल वैन हादसे के बाद जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई तो शिक्षा विभाग ने जिले के सौ से अधिक बिना मान्यता के संचालित विद्यालयों पर ताला लगा दिया। इसके बाद उन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में प्रवेश करने का निर्देश दिया गया। बाद में लगभग एक दर्जन ऐसे विद्यालयों को मान्यता देकर संचालित करने की अनुमति दे दी गई, जिनकी फाइल विभाग के पास लंबित थी। लेकिन मामला ठंडा पड़ने के बाद कई सील विद्यालय भी चोरी छिपे फिर संचालित होने लगे। महाराजगंज, चौरी, घोसिया, औराई, अभोली, सुरियावां समेत जिलेभर में तमाम अमान्य विद्यालयों को उनके संचालक चला रहे हैं। सुबह सात बजे के पहले खुलने वाले इस विद्यालयों को अधिकतम 10.30 तक बंद कर दिया जाता है। ऐसे में विभाग की मिलीभगत की भी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन, अगर कोई घटना हो गई, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, इसको लेकर सवाल उठने लगे हैं।
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