ज्ञानपुर (भदोही)।
मखमली कालीनों के लिए विश्वविख्यात कालीन नगरी भदोही के नौनिहाल कुपोषण की जद में आ गए हैं। कुपोषण से जंग में सरकार की ओर से चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाएं धरातल पर फलीभूत होती नहीं दिख रही है। विभाग के त्रैमासिक रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 21 हजार से अधिक बच्चे कुपोषित और छह हजार अति कुपोषित हैं।
केंद्र और प्रदेश के महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से महिलाओं और बच्चों की बेहतरी के लिए तमाम योजनाएं चल रही हैं। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से गर्भवती धात्रियों और नौनिहालों को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक आहार, हाटकुक्ड समेत अन्य योजनाएं संचालित की जाती हैं। विभाग की लचर व्यवस्था के चलते सरकार की कल्याणकारी योजनाएं धरातल पर फेल हो जा रही हैं। सूबे में नई सरकार बनने के बाद पूर्व की चल रही योजनाओं को लेकर असमंजस की स्थिति है, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल बदहाल है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो हाटकुक्ड और पौष्टिक आहार योजना में करीब तीन से चार करोड़ रुपये प्रत्येक छह माह में खर्च होता है, लेकिन उसका असर कहीं दिख नहीं रहा है। विभाग की ओर से जुलाई में बनाई गई त्रैमासिक रिपोर्ट के अनुसार जिले में 21 हजार 522 कु,ोषित और छह हजार 127 अति कुपोषित बच्चे हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अनुपमा शांडिल्य ने कहा कि सरकार की योजनाओं को शत प्रतिशत लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। हाट कुक्ड और पौष्टिक आहार का बजट गत तीन महीनों से नहीं आया। इसके लिए शासन को अवगत कराया गया है। इसको लेकर लोगों को जागरूक होने की जरूरत है।
लापरवाही से होता है कुपोषण
ज्ञानपुर। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनिल श्रीवास्तव का कहना है कि लापरवाही के चलते कुपोषण बढ़ता है। जिले में हर तीसरी गर्भवती महिला कुपोषण की शिकार है। हमारे समाज में स्त्रियां अपने स्वयं के खानपान पर ध्यान नहीं देती हैं। जबकि गर्भवती स्त्रियों को ज्यादा पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है। उचित पोषण के अभाव में गर्भवती माताएं स्वयं तो रोगग्रस्त होती ही हैं। साथ ही होने वाले बच्चे को भी कमजोर और रोगग्रस्त बनाती हैं। उन्हें फलदार, पत्तीदार सब्जी, प्रोटीन, कैल्शियम युक्त भोजन करना चाहिए।