पोस्टकार्ड पर 21 हजार बार भगवान राम का नाम लिखने वाली सुप्रिया बरनवाल।
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ज्ञानपुर(भदोही)। पोस्टकार्ड के छोटे से कार्ड पर कितनी लाइनें लिखी जा सकती हैं। बमुश्किल 20, 25, या अधिक से अधिक 50 लाइनें। इन्हें पढ़ने में पांच, सात या फिर 10 मिनट से ज्यादा नहीं लगेंगे। इस धारणा को देवनाथपुर की सुप्रिया बरनवाल ने गलत साबित कर दिया है। पोस्टकार्ड पर भगवान राम के नाम को 21 हजार 100 बार लिखकर उन्होंने एक अलग मिसाल पेश की है। सुप्रिया इससे पूर्व पोस्टकार्ड पर पूरा सुंदरकांड लिख चुकी हैं। हालांकि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॅार्ड में नाम शामिल कराने की उनकी हसरत अभी अधूरी है।
आजमगढ़ निवासी गुलाब चंद बरनवाल की पुत्री सुप्रिया शुरू से ही होनहार थीं। हमेशा कुछ अलग करने की ललक उन्हें बचपन से ही रही। स्नातक की पढ़ाई करते समय ही छोटे-छोटे अक्षरों में लिखने के अभ्यास का जुनून सवार हुआ। वह पढ़ाई के दौरान ही कई धार्मिक किताबों को कम से कम जगह में अधिक शब्दों को लिख रही थीं। इस हुनर को देख साथी भी दांतों तले अंगुल दबा लेते थे। इसी बीच उनकी शादी देवनाथपुर निवासी अंजनी कुमार के साथ हो गई। ससुराल आने के बाद सर्वप्रथम उन्होंने पोस्टकार्ड पर दुर्गा चालीसा लिखने का काम किया। धीरे-धीरे उत्साह बढ़ने लगा। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम शामिल कराने का जज्बा लेकर उन्होंने जुलाई 2014 में एक ही पोस्टकार्ड पर सुंदरकांड सहित हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक लिख चुकी है। करीब छह साल बाद सुप्रिया ने पोस्टकार्ड पर ही 21 हजार बार भगवान राम के नाम को उकेरा।
सुप्रिया ने बताया कि परिवार में व्यस्तता के कारण वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम शामिल कराने की उसकी ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी। अब बच्चों की पढ़ाई आदि कार्यों में ही अधिक समय लग जाता है। पोस्टकार्ड पर छोटे-छोटे अक्षरों में लिखने के लिए एकाग्रचित और समय चाहिए। ऐसे में जो माहौल पहले था, वह अब नहीं मिल पा रहा है।