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इंद्र के कोप से बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने उठाया गोवर्धन

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सीतामढ़ी। जाह्नवी के पावन तट पर स्थित कोनिया क्षेत्र के तुलसी गांव में आयोजित श्रीमद्भभागवत कथा ज्ञानयज्ञ में शनिवार को श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करने के साथ ही झांकियों का मंचन किया गया। इस मौके पर काशी से आए कथा मर्मज्ञ डॉ. रिपुसूदन मिश्र ने कहा कि देवराज इंद्र के कुपित हो जाने पर गोकुल-वृंदावन क्षेत्र को बारिश, आंधी-तूफान से बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अंगुलियों पर उठा लिया था।
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कलातुलसी गांव निवासी राष्ट्रपति एवं विश्व भारती पुरस्कारों से विभूषित काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. रामयत्न शुक्ल के यहां आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा स्थल पर सरस्वती पुत्रों का जमावड़ा दिखा। कार्यक्रम में द्वारिका पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, शंकराचार्य के उत्तराधिकारी स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद की उपस्थिति में काशी विद्युत परिषद के तमाम विद्वान शामिल हुए। इस मौके पर श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराते हुए डॉ. रिपुसूदन मिश्र ने श्री गोवर्धन ने कहा कि गोवर्धन लीला एक रहस्यमयी लीला है। इस मौके पर स्वामी अवमुक्तेश्वरा नंद ने अपने आशीर्वचनों से लोगों को अभिसिंचित किया। कार्यक्रम में ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र, राहुल दूबे, विष्णु प्रकाश सेठ, डॉ रामाश्रय शुक्ला, कमला शंकर मिश्रा, छोटेलाल शुक्ला, श्रीकांत शुक्ला, आदर्श पांडेय, कालू पांडेय, सत्यनारायण मिश्र, बब्बू सिंह सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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