ज्ञानपुर (भदोही)।
जिले में जर्जर भवन खतरे का सबब बन चले हैं। विभिन्न नगरीय इलाके में सैकड़ों भवन अब गिरे, तब गिरे वाली हालत में पहुंच गए हैं। हैरत की बात यह है कि इसके बाद भी इन भवनों में लोग रह रहे हैं। कई मकानों को प्रशासन की ओर से जर्जर घोषित कर दिया गया है, बावजूद इसके उनमें काम हो रहा है। सरकारी भवन भी जर्जर हालत में व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहे हैं। ज्ञानपुर तहसील भवन और बिजली विभाग के कार्यालय इसकी बानगी हैं। एक अनुमान के मुताबिक, सरकारी और निजी भवन, विद्यालय और अन्य मिलाकर लगभग ढाई सौ इमारतें जर्जर हालत में हैं। इनमें से कई भवनों में लोग निवास भी कर रहे हैं। स्कूलों में बच्चे पढ़ रहे हैं।
भदोही नगर में 25 तो गोपीगंज में 15, इसी तरह ज्ञानपुर, घोसिया, खमरिया और सुरियावां आदि नगरों में भी बड़ी संख्या में जर्जर भवन खतरे को निमंत्रण देते आसानी से दिख जाएंगे। हैरत की बात यह है कि कई भवन नगर निकायों की ओर से जर्जर घोषित भी कर दिए गए हैं लेकिन उनमें लोग रह रहे हैं। नगर निकाय की ओर से उन्हें नोटिस देकर भुला दिया गया है। भवनों की हालत देखकर किसी की भी पेशानी पर बल पड़ जाए। गोपीगंज नगर में पिछले वर्ष एक जर्जर धर्मशाला की छत गिर गई थी। संयोग ही था कि उस समय कोई उसके नीचे नहीं आया, बरना बड़ा हादसा हो सकता था। इसी तरह भदोही, नई बाजार, सुरियावां आदि नगरों में भी जर्जर भवन मुसीबत का सबब बने हैं। सरकारी भवन भी जर्जर हाल हो गए हैं, जिनमें काम हो रहा है। ज्ञानपुर तहसील का भवन कंडम घोषित किया जा चुका है लेकिन इसके बावजूद इसमें काम होता है। कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ी रहती हैं। इसी तरह, ज्ञानपुर के बिजली विभाग के दफ्तर की छतें इतनी जर्जर हो गईं हैं कि वे आए दिन चप्पड़ छोड़ती रहती हैं। पिछले दिनों चप्पड़ गिरने से दो कर्मचारी चुटहिल भी हो गए थे। इन भवनों को बदलने के लिए कई बार विभाग ने गुहार लगाई, लेकिन बात नहीं बनी। जिलाधिकारी विशाख जी ने कहा कि राजस्व से जुड़े जर्जर भवनों को ध्वस्त करने के लिए जहां कहीं से भी एनओसी मांगी गई, हमने उसे दे दी। कुछ खास विभागों के भवन और निजी भवनों से जुड़ी कार्रवाई संबंधित विभाग और नगर निकायों से होनी है। उस संबंध में प्रगति की रिपोर्ट लेकर अगली कार्यवाही की जाएगी।