ज्ञानपुर। तीन मासूमों की मौत और 12 से अधिक के झुलसने के बाद भी अमान्य स्कूलों पर शिक्षा विभाग की मेहरबानी कम नहीं हुई। मान्यता के खेल में मानक फेल हो गए और डेढ़ माह के अंदर अमान्य 125 स्कूलों में से करीब 70 को मान्यता की रेवड़ी बांट दी गई। लाखों खर्च कर शिक्षा का कारोबार करने वाले प्रबंधकों ने भी गर्दन फंसी देखकर दिल खोलकर विभागीय अधिकारियों की हथेली गर्म की। मान्यता को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यपणाली एक बार फिर सवालों में घिर गई है।
जिले में 1143 सरकारी प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के अलावा मान्यता प्राप्त 430 प्राथमिक और 305 पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित होते हैं। इन स्कूलों के अलावा बड़ी संख्या में अवैध तरीके से विद्यालय संचालित हो रहे थे। 12 जनवरी को लखनो गांव में स्कूल वैन में आग लगने से 19 बच्चे झुलस गए थे। इनमें तीन बच्चों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य बच्चे अब भी अस्पताल म़ें जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। घटना के बाद बेसिक शिक्षा विभाग और प्रशासन की ओर से अवैध स्कूलों पर सख्ती बरती गई और 125 अमान्य स्कूलों को सील कर दिया गया। हालांकि डेढ़ महीने के अंदर ही 70 स्कूलों को फिर मान्य कर दिया गया।
पहले चरण में 13, दूसरे चरण में करीब 30 और तीसरे चरण में 25 स्कूलों को मान्यता दे दी गई। लाखों खर्च कर शिक्षारूपी संस्थान के जरिए अपनी सेहत बनाने के लिए प्रबंधक भी कार्रवाई से फंस गए और अपना कारोबार बचाने के लिए दिल खोलकर खर्च किया। यही नहीं मान्यता की फाइलों को फाइनल करने के लिए मान्यता के पटल बाबू तक को बदल दिया गया। जिन्होंने कोरम पूरा किया, वह पास हो गए जो नहीं कर सके वह मान्यता कराने में फेल हो गए। बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार ने कहा कि जिन स्कूलों को मान्यता मिली है, उनका वह स्वयं भी निरीक्षण कर चुके हैं।
जेई से मिली एनओसी, आख्या पर सवाल
ज्ञानपुर। मान्यता के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों के निरीक्षण पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों की मानें तो कुछ ब्लॉकों में 10 दिन पहले ही निरीक्षण आख्या कर रिपोर्ट ओके दर्शा दी गई, जबकि निरीक्षण बाद में किया गया। आरटीई के तहत स्कूल की मान्यता के लिए बीएड, बीए के शिक्षक होने चाहिए। उनकी भरपाई करने के लिए कई सरकारी शिक्षकों तक का नाम भेज दिया गया। यही नहीं आधे अधूरे भवनों को फाइनल टच दिखाने के लिए लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंताओं से एनओसी ले ली गई।
मान्यता के लिए क्या हैं मानक
ज्ञानपुर। प्राथमिक विद्यालय के लिए पांच कमरे 20 बाई 20 फीट के होने चाहिए। विद्यालय के नाम आधा एकड़ भूमि, शौचालय बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग। इसके अलावा पुस्तकालय का निर्माण, अगिभन शमन यंत्र की स्थापना, हेडमास्टर एवं शिक्षकों के लिए कार्यालय, भूकंपरोधी भवन जरूरी है। जबकि जूनियर के लिए आठ कक्षा कक्ष, खेलकूद का मैदान, कमरों की साइज 25 बाई 25 फीट होनी चाहिए। साथ ही हेडमास्टर और शिक्षकों के लिए कार्यालय भी होने चाहिए।
मान्यता समिति में शामिल अधिकारियों की निरीक्षण आख्या एवं रिपोर्ट के आधार पर स्कूलों को मान्यता दी जाती है। जिन स्कूलों को मान्यता दी गई है, उसकी जांच मैं स्वयं करूंगा। खामियां मिलने पर खंड शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
आरके तिवारी, मंडलीय शिक्षा निदेशक मिर्जापुर