चौरी। महिलाओं को सशक्त और आर्त्मनिर्भर बनाने के लिए निस्वार्थ भाव से समाजसेवा में जुटीं शिल्पी सिंह महिलाओं के लिए मिसाल बन गईं हैं। पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की अपनी मुहिम के जरिए उन्होंने अब तक लगभग 150 महिलाओं को सशक्त और स्वावलंबी बना दिया है। यहीं नहीं वह वाराणसी की एक एनजीओ के माध्यम से कई महिलाओं को विभिन्न समस्याओं में न्याय भी दिला चुकी हैं।
चौरी क्षेत्र के पचपटिया गांव निवासी गणेश प्रसाद शर्मा के दो बेटे और दो बेटियों में शिल्पी सिंह बड़ी हैं। बनारस से एमए की पढ़ाई पूूरी करने के बाद समाज में महिलाओं के लिए कुछ करने की चाहत ने उन्हें समाजसेवा में ला दिया। लगभग पांच वर्ष तक वाराणसी में एनजीओ के माध्यम से महिला उत्पीड़न, दहेज उत्पीड़न से जुड़े कई मामलों में न्याय दिलाने के लिए उल्लेखनीय काम करने के बाद पिछले डेढ़ साल से वह भदोही जिले में महिलाओं को सशक्त बनाने के काम में जुटी हैं। इन दिनों लक्षापुर बाजार में ग्रामीण अंचल की छात्राओं को सशक्त बनाने का काम वह जोर शोर से कर रही हैं। सुधा अमृतम वेलफेयर सोसाइटी की ओर से खोले गए प्रशिक्षण केंद्र में छात्राओं को नि:शुल्क सिलाई, कढ़ाई, बुनाई और पेंटिंग का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं। साथ ही कक्षा पांच तक के बच्चों को नि:शुल्क कोचिंग और सामाजिक ज्ञान देती हैं। ‘खुद के अलावा दूसरों के लिए भी जीना चाहिए’ की सोच के साथ आगे बढ़ रहीं शिल्पी कहती हैं कि देश और समाज तभी तरक्की के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है, जब प्रत्येक व्यक्ति दूसरे के लिए जीना शुरू कर दे। बकौल शिल्पी बचपन से ही मेरा सपना खुद की संस्था बनाकर समाज सेवा करना था। क्योंकि अवसरों के अभाव में तमाम प्रतिभाएं दम तोड़ देतीं हैं। इसलिए खासकर महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना मेरा प्रमुख मिशन है। जब महिलाएं आत्मनिर्भर और सशक्त होंगी तभी देश और समाज की उन्नति संभव है।