ज्ञानपुर। फरवरी महीना फलदार वृक्षों और बागवानी के लिए सबसे मुफीद है। सिंचाई की सुविधा हो तो इस समय आम, अमरूद, नीबू, आंवला, बेर, पपीता जैसे पौधे रोपने के लिए यह सबसे अनुकूल समय है। इस महीने में पौधों को आसानी से पूरा पोषण मिल जाता है।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. शैलेंद्र देव दुबे ने कहा कि जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे फरवरी में तरह-तरह की बागवानी कर सकते हैं। बरसात के मौसम के बाद फरवरी ही बागवानी के लिए सबसे उपयुक्त समय है। आम, अमरूद, नीबू, आंवला, बेर, पपीता आदि फलदार पौधों को इस महीने में लगाया जाए तो उनका आसानी से विकास होता है। कहा कि बागवानी के लिए दिसंबर में ही पौधों के लगाने के लिए गड्ढे खोदकर गोबर की खाद डालकर छोड़ देनी चाहिए। इसमें एक या डेढ़ साल के पौधे की फरवरी के शुरुआती 15 दिनों तक रोपाई कर देनी चाहिए। कहा कि फरवरी में पौधरोपण से पौधों में नमी की कमी की आशंका नहीं रहती। हालांकि पौधों में उचित विस्तार ं देखने को नहीं मिलता, लेकिन उन्हें जमीन से भरपूर पोषण मिलता है। इस समय लगाए गए पौधे करीब चार या पांच साल के बाद फल देने लगते हैं। कहा कि इन पौधों में फल लगने की प्रक्रिया वर्षा ऋतु वाले पौधों से ज्यादा होती है।
रोग से बचाने के लिए करें ये उपाय
जिला उद्यान विभाग अधिकारी के मुताबिक जिन पौधों के पत्ते कुपोषण के कारण झड़ने लगते हैं और पत्तों में काले धब्बे (ड्राईबैग रोग) रोग ठंड की धुंध के कारण पौधों में लगता है। ऐसे में पौधों के कली वाले भाग सूख जाते हैं। इससे पौधों का विकास रुक जाता है। इन रोगों से बचने के लिए 100 ग्राम नाइट्रोजन, 100 ग्राम पोटास, 100 ग्राम फास्फोरस और 50 ग्राम कॉपर, बोरान और जिंक को संयुक्त रूप से प्र ति वृक्ष प्रति वर्ष के हिसाब से पौधों की जड़ों को देना चाहिए। कुपोषण से छुटकारा पाने के लिए मिलीबिग, इंडोसल्फान, डेमाक्रॉन का छिड़काव किया जाता है।