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रोक के बाद भी जला देते हैं कूड़ा

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जिले में कूड़ा निस्तारण की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। जिले के सात नगरीय इलाकों में कुल मिलाकर प्रतिदिन 75 मीट्रिक टन (एमटी) के आसपास कूड़ा निकल रहा है, जो जगह-जगह डंप किया जा रहा है। इसमें भदोही नगर पालिका क्षेत्र में अकेले 40 एमटी कूड़ा डंप होता है। इससे पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को झटका लग रहा है। जबकि नगर निकायों को ईटीपी की स्थापना का इंतजार है। उसके लिए ठोस पहल भी नहीं की जा रही है। केवल प्रस्ताव भर बनाकर दिया गया है। जमीन की तलाश भी संजीदगी से नहीं की जा रही है।
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भदोही नगर पालिका परिषद के सैनिटरी इंस्पेक्टर, शैलेश ठाकुर ने बताया कि नगर में हर रोज 44 मैट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इसके निस्तारण के लिए पालिका के पास कोई जगह नहीं है। आम तौर पर खाली स्थान पर ले जाकर कूड़ा डंप कर दिया जात है। प्रयास रहता है कि आसपास आबादी न हो। बताया कि कूड़ा में आग लगाने पर सख्ती से रोक है, लेकिन कुछ शरारती तत्व आदेशों की अवहेलना करते हैं। बताया कि शहर में सफाई कर्मी फैले हुए हैं, वे आग लगाने वाले पर नजर रखते हैं। हालांकि अब तक इस मामले में किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
इसी तरह गोपीगंज नगर पालिका में भी पांच एमटी कूड़ा हर रोज निकलता है, जो जहां-तहां फेंक दिया जाता है। नगर पालिका का दावा है कि कूड़े को गड्ढे आदि में डलवाकर मिट्टी पाट दी जाती है, लेकिन जगह-जगह बजबजाते कूड़े को आसानी से देखा जा सकता है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अवधेश भारतीय ने कहा कि खाली स्थान पर कूड़ा गिराया जाता है। जमीन उपलब्ध न हो पाने के कारण कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। नगर पालिका जमीन खरीदने के लिए भी तैयार है। कुछ ऐसा ही हाल ज्ञानपुर, घोसिया, खमरिया, नई बाजार और सुरियावां नगर पंचायतों का भी है। ज्ञानपुर में नगर का कूड़ा वीएनजीआईसी के बगल में डंप किया जाता है। आते-जाते लोगों को भयंकर दुर्गंध से जूझना पड़ता है।
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रोक के बाद भी जल रहा कूड़ा
भदोही। न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद भी शहर में कूड़ा जलाने पर रोक नहीं लग पा रही है। हालांकि कोर्ट का हवाला देते हुए नगर पालिका काफी पहले ही कूड़ा जलाने वालों पर कार्रवाई की बात कह चुकी है, लेकिन शहर की गलियों में अक्सर कूड़ा जलते और धुआं निकलते देखा जा सकता है। लोगों का कहना है कि एक तो नियमित कूड़ा नहीं उठता। दूसरा न्यायालय के आदेश का शहर में ढंग से प्रचार प्रसार नहीं हो सका है। बहुत से लोग तो अभी भी न्यायालय के आदेश से अनभिज्ञ हैं। नगर पालिका के पास ऐसी जगह नहीं निर्धारित नहीं है, जहां शहर का कूड़ा ले जाकर डंप किया जा सके। कुछ वर्ष पूर्व पिपरिस में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना के तहत कूड़ा डंपिंग स्थल निर्माण का प्रस्ताव किया गया था, जिसके लिए शासन ने धन भी आवंटित कर दिया था, लेकिन ग्रामीणों के भारी विरोध के चलते निर्माण कार्य रोक दिया गया था। तब से लेकर उक्त योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है और उसे अब तक किसी ने खोलने का प्रयास नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि शहर का कूड़ा शहर में जगह जगह डंप कर दिया जाता है। मछरहट्टा गली और काजीपुर रोड स्थित फकीर सेठ के अहाता में भारी मात्रा में कूड़ा डंप किया जा रहा है जिसमें अक्सर आग भी लगी रहती है। शहर की कई गलियां तो ऐसी हैं जहां हर रोज पालिका के सफाई कर्मी नहीं पहुंच पाते। इससे लोग कूड़ा इकट्ठा कर आग लगा देते हैं। लेकिन, उन्हें पर्यावरण पर इसके दुष्प्रभाव की जानकारी नहीं है। शहर में ऐसे कई लोग हैं जिन्हें तो न्यायालय के आदेश के बारे में भी नहीं पता।
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