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बदले मौसम में बीमारियों का हमला

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मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच बीमारियों ने फिर पांव पसारना शुरू कर दिया है। गर्मी बढ़ने के साथ ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। इससे मच्छरजनित बीमारी मलेरिया का प्रकोप बढ़ने लगा है। साथ ही टायफायड का बुखार बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को तोड़ने लगा है। यही वजह है कि शुक्रवार को जिले के सरकारी और निजी अस्पताल मरीजों की भीड़ से पटे रहे। अकेले जिला अस्पताल की इमर्जेंसी में 32 मरीज भर्ती कराए गए। जबकि अमूमन यह आंकड़ा 20 से 25 मरीजों का ही रहता है। कुछ ऐसा ही नजारा निजी अस्पतालों और दवा की दुकानों पर भी दिखा।
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दो दिन पूर्व की बारिश और मौसम में बढ़ती गर्माहट के बीच बीमारियों ने फिर पांव पसारना शुरू कर दिया है। मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच मलेरिया और टायफाइड बुखार का असर तेज हो गया है। मच्छरों का प्रकोप इन दिनों बढ़ गया है। मच्छरों से निपटने के लिए कारगर उपाय नहीं किया गया है। शुक्रवार को गिरधरपुर के श्यामलाल यादव, देवनाथपुर के अमरजीत, कांवल गांव निवासी संदीप, जोरई की सोनी, सागररायपुर के अनिल समेत 32 लोगों को जिला अस्पताल की इमर्जेंसी में भर्ती कराया गया। इनमें से ज्यादातर लोग तेज बुखार, उल्टी-दस्त से पीड़ित थे। जिला अस्पताल की ओपीडी में 952 पर्चियां कटीं। जबकि दो दिन पूर्व तक इमर्जेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों की तादाद सामान्य तौर पर 20-25 रहती थी। इस पर चिकित्सकों ने भी चिंता जताई। जिले के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि बदलते मौसम में सेहत को लेकर सजग रहने की जरूरत है। मच्छरों से बचाव बेहद जरूरी है। हाथ-पांव को ढंककर बच्चों को सुलाना चाहिए। रात में ठंड और दिन में तेज धूप के कारण गर्म हो रहे मौसम में लापरवाही बीमार कर सकती है।
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