ज्ञानपुर। लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ सियासत के समीकरण में अपने को सर्वोच्च दिखाने की होड़ मची हुई है। लेकिन, सियासत की कई पारी देख चुके ज्ञानपुर क्षेत्र के सागर रायपुर निवासी 73 वर्षीय शिवराज प्रसाद को यह दिखावे की सियासत रास नहीं आ रही है। अमर उजाला से बातचीत के दौरान कहा सियासत सिर्फ सत्ता की नहीं होनी चाहिए। क्योंकि देश और समाज से ऊपर सत्ता नहीं है। लेकिन, बदले दौर में सत्ता प्राप्ति सियासत का मकसद बन चुका है। यह परंपरा पिछले डेढ़ से दो दशक पूर्व से शुरू हुई है। वह अपने जीवन में कई लोकसभा और विधान सभा चुनाव देख चुके हैं। चार से पांच दशक पूर्व की सियासत देश और समाज के विकास से जुड़ी होती थी। लेकिन, अब की सियासत तो सत्ता प्राप्ति का पर्याय बन चुकी है। अब तो जनप्रतिनिधि क्षेत्र एवं जनपद के विकास में भी आम और खास के आधार पर भेदभाव करने लगा है। पहले जिले का सर्वांगीण विकास नागरिकों की मांग हुआ करती थी। लेकिन, उम्मीदवारों की कुंठित नीति और नीयत को देखकर उम्मीदवार भी अपने सियासत का चोला बदल लिया है। पहले क्षेत्र के लोग उम्मीदवार का चयन सामाजिक प्रतिष्ठा और कर्मठशीलता के आधार पर करते थे। इससे समाज का हर तबका बराबर लाभान्वित होता था। लेकिन, अब तो विकास में भी ऊंच, नीच, आम और खास के आधार पर जनप्रतिनिधि विकास का चयन कर रहे हैं। इस सब के लिए उम्मीदवार से ज्यादा वोटर जिम्मेदार हैं।