भदोही। जब कोई बेटा पूरा कुरान कंठस्थ कर लेता है तो उसके परिवार में किस तरह खुशियां मनाई जाती हैं, यह देखते ही बनता है। लगभग ऐसा ही नजारा गुरुवार को मोहल्ला पीरखांपुर के अख्तर अली के घर दिखा। जब हाफिजे कुरान होकर उनका बेटा मो.तौफीक घर पहुंचा। लोगों ने फूल माला पहनाकर स्वागत किया। मोहल्ले में मिठाई बांटी गई। पिता ने बताया कि उनके बेटे की उम्र महज 12 वर्ष थी, जब मोहल्ला कजियाना स्थित मदरसा हमीदिया में हाफिजे कुरान करने के लिए भेजा गया था। 4 वर्ष में उस्ताद हाफिज परवेज अच्छे, हाफिज अशफाक और हाफिज अलीरजा की देखरेख में उन्होंने हाफिजे कुरान पूरा कर लिया। इस मौके पर गुरुवार को मदरसे में समारोहपूर्वक उनकी दस्तारबंदी की गई। उस्ताद हाफिज परवेज ने कहा कि जिस मां बाप का बेटा हाफिजे कुरान हो जाए उनके लिए गर्व की बात है।