चौरी। लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ हर कोई सियासी रंग में रंगा दिखने लगा है, हालांकि कई चुनाव देख चुके चौरी के बुजुर्ग वर्तमान राजनीति से इत्तफाक नहीं रखते। उनका मानना है कि पहले जाति-धर्म से हटकर जनप्रतिनिधि का चयन होता था, जबकि अब माहौल दूसरा हो चुका है।
चौरी के कोल्हण निवासी 80 वर्षीय भगवानदास मौर्य ने बृहस्पतिवार को अमर उजाला से बातचीत में पुरानी चुनावी यादों को साझा किया। बताया कि विडंबना ही है कि मतदान से पहले जनप्रतिनिधि की छवि के साथ-साथ क्षेत्र के विकास को लेकर उनकी गंभीरता को परखने की प्रवृत्ति गुजरे दिनों की बात हो गई है। उस दौर में धनबल, बाहुबल का कोई निशान नहीं था। अच्छे छवि और विकास करने वाले जनप्रतिनिधि ही चुने जाते थे। मगर अब तो जहां से पैसा मिल रहा है, वहीं अच्छी छवि और विकास करने वाला जनप्रतिनिधि दिखने लगता है। पहले के जनप्रतिनिधि अच्छे और बुरे समय में एक ही पार्टी में रहना पसंद करते थे, लेकिन अब तो पांच साल में ही नेता कई पार्टियों का दामन थामने से गुरेज नहीं करते।