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रामकथा में मिलता है त्याग का दर्शन

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ज्ञानपुर। नगर के मुखर्जी पार्क में आयोजित श्रीराम कथा में अयोध्या के संत निर्मल शरण महाराज ने कहा कि प्रभु राम के जीवन से हमें शिक्षा लेनी चाहिए। इनसे त्याग का दर्शन मिलता है। भगवान राम एक सौतेली मां कैकेयी के कहने पर वन जाने को तैयार हो गए थे। बताया गया है कि संतान को माता- पिता का सम्मान करना चाहिए।
रामकथा में त्याग कूट-कूटकर भरा है। राम के वन जाने के समय लक्ष्मण और उनकी मां सुमित्रा का त्याग भी अलग है। लक्ष्मण अपनी मां सुमित्रा से विदा लेने गए तो माता सुमित्रा ने एक बार भी नहीं रोका, बल्कि तरकश और धनुष हाथ में दिया और कहा बेटा राम की रक्षा करते भले ही प्राण चले जाए, पर राम पर संकट नहीं आना चाहिए। भरत का त्याग देखें अगर राम ने भैया भरत के लिए राजगद्दी का त्याग किया तो भरत ने भी उस राजगद्दी को स्वीकार नहीं किया। मुख्य आरती मनोज तिवारी, अनिल पांडेय, संतोष जायसवाल, विश्वंभर उपाध्याय, डॉ. विनोद सिंह ने किया।
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घोसिया संवाददाता के अनुसार, संकटमोचन मंदिर शुकुलपुर चकवीरा में श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन व्यास अनादि महाराज ने श्रोताओं को रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाई। कहा कि रास और महारास सचमुच में निष्काम भाव का एक प्रेम प्रदर्शित करता है। भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र से हमें यह शिक्षा लेनी चाहिए कि प्रेम में आशक्ति का मापदंड हो और हम स्वयं में मेलजोल कायम रख सकें। इस मौके पर मंदिर के पुजारी लालबाबा महराज, बबलू शुक्ला, रविंद्र चौबे, आशीष, पिंटू मास्टर, ग्राम प्रधान विंध्यवासिनी शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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