ज्ञानपुर। 1200 करोड़ की लागत से औराई चीनी मिल में स्थापित होने वाले बायोफ्यूल संयंत्र का मसौदा फिलहाल फाइलों में उलझ गया है। सीएम की घोषणा के करीब पांच माह बाद भी अब तक कोई निर्णय नहीं हो सका। इससे रोजगार की उम्मीदें धूमिल होने लगी हैं, हालांकि प्रशासन का मानना है कि प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।
पूर्वांचल ही नहीं सूबे की सबसे अधिक चीनी उत्पादन के लिए गोल्ड मेडल पा चुकी दी सहकारी चीनी मिल 11 साल से बंद है। उसके काफी कल पुर्जे पूर्ववर्ती सरकारों ने ईधर-उधर भेज दिया। जबकि जो बचे हैं, वह जंग खा रहे हैं। मिल की 100 एकड़ से अधिक जमीन जस की तस पड़ी हुई है। 2017 में सूबे में जब भाजपा की सरकार बनी तो लोगों की उम्मीदें मिल चालू होने को लेकर जागी थीं। लेकिन सर्वे आदि कराने के बाद मिल चलाना मुश्किल दिखा। तीन जून 2018 को जिले में आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चीनी मिल परिसर में 1200 करोड़ की लागत से बायो फ्यूल प्लांट स्थापित करने की घोषणा की। घोषणा होने के बाद लोगों को लगने लगा कि जल्द ही प्लांट स्थापित हो जाएगा लेकिन पांच माह से अधिक समय गुजरने के बाद भी अब तक प्लांट को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं दिखी। मुख्य विकास अधिकारी हरिशंकर सिंह ने कहा कि सीएम की घोषणा के 15 दिन के अंदर प्रशासनिक स्तर से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया। अब शासन को तय करना है कि प्लांट कहां और कैसे स्थापित करेगा। प्लांट की स्थापना होने से जिले के युवाओं के लिए रोजगार सृजित होगा।
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कूड़े-कचरे से तैयार होगा ईंधन
ज्ञानपुर। सीएम योगी आदित्यनाथ की घोषणा अगर पूरी हुई तो बायोफ्यूल प्लांट से लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी। इसकी मदद से फसलों के अवशेष और कूड़े-कचरे का उपयोग कर ईंधन बनाया जाएगा।