ज्ञानपुर। पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान पर सवाल खड़े हो गए हैं। डीघ विकास खंड के आधा दर्जन गांवों में टीके लगने के बाद भी मवेशी खुरपका रोग के शिकार हो रहे हैं। इसी तरह भदोही ब्लॉक में भी बीमारी फैली हुई है। शनिवार को यहां दो पशुओं की की मौत हो चुकी है। इससे जहां पशुपालक परेशान हैं, वहीं वैक्सीन की गुणवत्ता और पशु चिकित्सा विभाग की कार्य प्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है। बारिश के बाद पशुओं खुरपका-मुंहपका जैसी गंभीर बीमारियों का प्रकोप फैलता है। इससे बचाव के लिए 15 सितंबर को टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था, जो 30 अक्तूबर तक चलेगा। पशु चिकित्सा विभाग का दावा है कि जिले में अब तक 3.37 लाख मवेशियों को टीके लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद डीघ ब्लॉक के भमौरा, धनुतलसी, कूड़ीकला, भदरावं और इटहरा समेत आसपास के दर्जन भर से अधिक गांवों के मवेशी खुरपका रोग की चपेट में आ गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पैरावेट टीमें तय मात्रा में मवेशियों को वैक्सीन नहीं दे रहीं, जिससे टीकाकरण अभियान विफल साबित हो रहा है। आरोप है कि सरकारी वैक्सीन निजी पशु चिकित्सकों को बेच दी जाती है। बाद में प्राइवेट चिकित्सक मंहगे दामों पर उक्त टीके लगाते हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरबी मौर्य ने कहा कि मुंहपका-खुरपका की वैक्सीन 20 दिन के बाद प्रभावी होती है। बारिश अधिक होने से इस साल इसका प्रभाव अधिक है। पूर्व के वर्षो में यह रोग उतना नहीं फैला था। उन्होंने कहा कि वैक्सीन बेचने की शिकायत कहीं से मिली नहीं है अगर मिलेगी तो जांच कराई जाएगी।