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अभिलेखागार में चला गया था कमिश्नर का आदेश

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ज्ञानपुर (भदोही)।
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तालाब की जमीन पर बने पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय के दोनों शिक्षण संस्थानों का मामला तूल पकड़ने लगा है। दोनों शिक्षण संस्थानों की शुरू हुई जांच के बाद मामले की खामियां परत दर परत खुलने लगी हैं। शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उससे यह बात सामने आ रही है कि 2012 में कमिश्नर की ओर से जो आदेश दिया गया, वह एसडीएम कोर्ट के बजाए सीधे अभिलेखागार में चला गया। इससे इस प्रकरण में आगे कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
जिलाधिकारी विशाख जी ने बताया कि आराजी संख्या 521, 522 और 524 जमीन पर शिक्षण संस्थान बने हैं। एसडीएम कोर्ट ने संबंधित विभाग को इस जमीन को तालाब के रूप में दर्ज कराने का आदेश दिया था। इस फैसले के खिलाफ मामले को हाईकोर्ट ले जाया गया। हाईकोर्ट ने मामले को कमिश्नरी कोर्ट में भेजा था। तीन महीने के अंदर मामले की जांचकर कार्रवाई करने के कमिश्नर कोर्ट का आदेश एसडीएम कोर्ट आने के बाद अभिलेखागार में चला गया। जिसके चलते बेदखली का आदेश पारित नहीं हुआ। इस मामले में जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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उधर, शिक्षण संस्थान बनाने के आरोप में घिरे बसपा के पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय सोमवार को अपने बचाव में उतर गए। एक विज्ञप्ति जारी कर उन्होंने कहा कि यह मामला कमिश्नरी कोर्ट में विचाराधीन है। परती की जमीन पर शिक्षण संस्थान का निर्माण हुआ है। राजनीतिक साजिश के तहत ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र उन्हें बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा-बसपा के शासनकाल में ज्ञानपुर विधायक की शिकायत पर मामला हाईकोर्ट में आया। कोर्ट ने इस मामले को कमिश्नरी में भेजा, जो विचाराधीन है। विद्यालय की जमीन में न तो हेराफेरी की गई है और न ही अभिलेखों से छेड़छाड़ हुई है। विधायक के खिलाफ अवैध बालू खनन की शिकायत मुख्यमंत्री से करने पर विद्यालय और मुझे बदनाम किया जा रहा है।
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लीपापोती हुई तो सदन में उठाएंगे मामला: मिश्र
ज्ञानपुर। विधायक विजय मिश्र ने कहा कि कमिश्नर के आदेश में यह कहा गया था कि तीन माह में मामले का निपटारा कराया जाए लेकिन आज तक मामले को दबाया गया है। पूर्व सांसद ने जमीन बचाने के लिए भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। प्रशासनिक स्तर से इस प्रकरण में कार्रवाई नहीं की गई तो कोर्ट से लेकर विधानसभा में मामले को उठाया जाएगा। विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री सरकारी जमीन और तालाबों से कब्जे हटाने के लिए जहां कटिबद्ध हैं, वहीं व्यापक स्तर पर तालाबों पर कब्जा किया गया है।
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