जिले के परिषदीय विद्यालयों में पेयजल संकट नौनिहालों के लिए मुश्किलों का सबब बन गया है। करीब 170 विद्यालयों में हैंडपंप या तो नहीं हैं, या फिर खराब पड़े हैं।
ऐसे में इनमें पढ़ने वाले लगभग 17 हजार छात्र-छात्राओं को पानी की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। मौसम में गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी की जरूरत भी बढ़ गई है।
प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पेयजल की किल्लत न हो, इसके लिए भवन निर्माण के दौरान ही हैंडपंप लगाया जाता है,
लेकिन जिले में ठेकेदारों की मनमानी के चलते ज्यादातर स्कूलों का हैंडपंप मानक के अनुरूप नहीं लगे। छह से सात माह के अंदर ही हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया।
आरोप है कि ठेकेदार निर्धारित 130 फीट की बजाए 80 से 100 फीट ही बोरिंग कर पैसे बचा लेते हैं। इससे पानी का स्तर नीचे खिसकने के साथ ही हैंडपंप जवाब दे जाते हैं।
विभागीय आंकड़ाें पर गौर करें तो जिले के 107 प्राथमिक और 63 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में या तो हैंडपंप नहीं हैं या पानी देना बंद कर दिया है।
इससे इन स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 17 हजार से अधिक नौनिहाल प्यासे रहने को मजबूर हैं। मध्याह्न भोजन खाने के बाद बच्चों को स्कूल से बाहर जाकर प्यास बुझाते हैं।
मार्च से लेकर जून तक पानी के लिए स्कूलों में हाहाकार मचना तय माना जा रहा है। बीएसए डॉ. सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि हैंडपंपों के रिबोर के लिए जल निगम को तीन बार पत्र लिखा गया है।
ज्यादातर स्कूलों में हैंडपंप रिबोर नहीं हो सके हैं।