जंगीगंज। शासन के निर्देश के बाद भी जिले में छह से सात रूट को छोड़ कर अन्य रूटों पर सरकारी बसें नहीं चल सकीं। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीण अंचलों में सरकारी बस चलाने का दावा सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गया।
1056 किलोमीटर के दायरे में फैले जनपद के लोगों के लिए औराई, ज्ञानपुर और भदोही में रोडवेज स्टेशन जरूर बने लेकिन सरकारी बसों का संचालन राम भरोसे ही है। दशक भर पूर्व ज्ञानपुर में बना बस स्टेशन जहां शोपीस होकर रह गया है वहीं भाजपा सरकार में ग्रामीण अंचलों में बसों के दौड़ने की आस जगी जरूर वह भी पशोपेश में ही रह गया, जबकि तटवर्ती क्षेत्र हो या पूर्वी छोर का औराई और परसीपुर सीमा। पश्चिमी छोर पर ऊंज से ज्ञानपुर पहुंचने वालों की संख्या बराबर अधिक रहती है। बावजूद इसके बसों का संचालन कागजों तक ही रह गया और स्टेशन में ताला लटक जाने से बंधी आस भी समाप्त हो गई। संसारापुर-अकोढ़ा वाया भरतपुर, भरतपुर, रोही, जोगापुर, सुरियावां, मोढ़, मतेथू, बीरमपुर, कटरा बाजार, कठौता-गोपीगंज, दानूपुर आदि रूटों का प्रस्ताव विभाग की फाइलों तक रह गई। परिवहन बसों के अभाव में डग्गामार वाहन चालक मनमानी किराया वसूल कर यात्रियों आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने में कसर नहीं छोड़ते। क्या करोड़ों रुपये खर्च कर बनवाए गए स्टेशनों के दिन बहुरेंगे या नहीं कोई भी जिम्मेदार इस पर जवाब देना तक मुनासिब नहीं समझता।