ज्ञानपुर। सिक्सलेन निर्माण में हाईवे के किनारे से साढ़े आठ हजार हरे पेड़ कट गए। इससे हाईवे पर हरियाली का संकट हो गया है। मजे की बात यह है कि हाईवे के किनारों को हरा-भरा बनाने के बजाए वन विभाग की ओर से पौधरोपण के लिए मिर्जापुर में 26 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की गई है। 31 लाख 68 हजार का बजट भी आवंटित हो चुका है।
जिले में ऊंज से लेकर बाबूसराय तक करीब 40 किमी तक हाईवे पड़ता है। लुंबनी-दुद्धी मार्ग के बाद सिक्सलेन निर्माण में भी जिले में आठ हजार 539 पेड़ों की बलि चढ़ गई। हाईवे के उत्तरी और दक्षिणी छोर पर पेड़ों के कटने से कहीं भी छांव मिलना जहां मुश्किल हो गया है वहीं पर्यावरण को भी काफी नुकसान पहुंच रहा है।
हाईवे हो या शहर की अन्य राहें, हर जगह बड़े पेड़ गायब हो रहे हैं। इससे आरएसपीएम यानि श्वांस रोग कणीय पदार्थ की मात्रा तेजी से बढ़ रही है, जो भविष्य में बढ़े खतरे का संकेत है। पेड़ों की कटाई के बाद उसकी भरपाई की जाती है लेकिन जिले में जमीन न होने से मिर्जापुर में पौधरोपण किया जाएगा। प्रभागीय वनाधिकारी पीसी सिंह ने कहा कि जिले में सड़क चौड़ीकरण में कटे पेड़ों के लिए मिर्जापुर में 26. 439 हेक्टेअर जमीन चिन्हित की गई है। इसके लिए मिर्जापुर डिवीजन
देहात में भी हो रहा पेड़ों का कटान
ज्ञानपुर। हाईवे छोड़िए, शहर से देहात के लिए जाने वाली राहें भी वृक्ष विहीन होती जा रही हैं। प्रमाण देखना है तो ज्ञानपुर-गोपीगंज मार्ग पर भी गिने-चुने पेड़ बचे हैं। कुछ बरस पूर्व तक यहां से गुजरने पर सड़कों पर हरियाली ही हरियाली नजर आती थी। दूर-दूर तक पेड़ नजर आते थे, लेकिन अब हालात दूसरे हैं। सड़क किनारे दुकाने आगे बढ़ती जा रही हैं तो पेड़ गायब होते जा रहे हैं। कहीं पर रात के अंधेरे में कुल्हाड़ी चलती है तो कहीं पर विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से पेड़ सूखा दर्शाकर कुल्हाड़ी चला दी जाती है।
पौधरोपण के बाद भी नहीं बढ़ रहा वनक्षेत्र
ज्ञानपुर। पर्यावरण केे हरा- भरा बनाने के लिए हर साल भले ही लाखों पौधे रोपित किया जाता है लेकिन वन क्षेत्र का दायरा नहीं बढ़ रहा है। पांच साल पूर्व भी जिले में वन क्षेत्र 0.01 फीसदी था जो अब भी कायम है। विभाग का मानना है कि उनके पास जमीन नहीं है। ग्रामसमाज, किसान के निजी जमीन पर पौधरोपण होता है, जिससे वन क्षेत्र पहले की तरह अब भी है।