ज्ञानपुर। मौसम के बदले मिजाज ने रविवार को किसानों को धुकधुकी बढ़ा दी। पूरे दिन भगवान भास्कर के दर्शन नहीं हुए और बदली के बीच हल्की हवाओं ने कई दिनों से तल्ख हो रही धूप के असर को कम कर दिया। लोगों ने हल्की सिहरन महसूस की। कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी की भी सूचना मिली। हालांकि जानकार मौसम के रुख को देखते हुए देर रात तक बारिश की संभावना से इनकार नहीं कर रहे थे। इसके मद्देनजर किसान अपनी फसलों को सहेजने में जुटे दिखे।
रविवार को पौ फटी तो कालीन नगरी का मौसम बदला-बदला सा था। आसमान में बादलों की घेरेबंदी हो गई थी और हवाओं के साथ हल्की तापमान में गिरावट ने किसानों की नींद उड़ा दी। यद्यपि बारिश इस समय किसी फसल के लिए नुकसान नहीं है, लेकिन तैयार होकर खेत-खलिहानों में पड़ी दलहनी और तिलहन की फसलों को क्षति पहुंच सकती है। मौसम का रुख देखते ही किसानों ने बाहर पड़ी फसलों और उपज को सहेजना शुरू कर दिया। भिदिउरा के किसान मनीष कुमार ने कहा कि इस समय फसल को बचाना बहुत जरूरी है। मेरी सरसों की फसल खलिहान में रखी है। अगर भींग गई तो पखवारे भर का समय उसे सुखवाने में चला जाएगा। इसी तरह बैराखास के किसान अनुपम आनंद ने कहा कि इस बारिश हो गई तो गेहूं के लिए ठीक ही होगा, बशर्ते ओले न गिरें। इस मौसम में अक्सर ओले गिरने की आशंका रहती है। ऐसा हुआ तो सरसों के फूल झड़ जाएंगे। मटर को भी नुकसान हो सकता है। कहा कि तमाम किसानों कि फसल अब भी खलिहानों में पड़ी है।
कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके चतुर्वेदी ने कहा कि हल्की बारिश फसलों के लिए नुकसानदेय नहीं है। सब्जी और गेहूं के लिए हल्का पानी फायदेमंद ही होगा। लेकिन, ओले गिरे और तेज हवाएं चलीं तो मुश्किलें बढ़ सकती है। आम के बौर में पानी टिका तो उसको नुकसान हो सकता है। इसके लिए कारबेंडाजिम का छिड़काव किया जाना चाहिए।