ज्ञानपुर। संत शिरोमणि गुरू रविदासजी की जयंती बुधवार को जिले में धूमधाम से मनाई गई। स्कूल, कालेजों संग निजी संस्थानों ने गोष्ठी, बैठक आयोजित कर संत के जीवनी पर प्रकाश डाला। उन्हें आडंबर और कुप्रथाओं को खत्म करने वाला संत बताया। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में जिला कृषि अधिकारी अशोक प्रजापति ने रविदास जी के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान गीतों और विचारों के माध्यम से संत रविदास की जीवनी पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य की सफलता के लिए एक लक्ष्य स्थापित करना चाहिए। डॉ. अमित गोयल ने कहा कि समय-समय पर भारतीय समाज को कुरीतियों, आडंबरों और कुप्रथाओं से बांटने का प्रयास किया गया, लेकिन रविदासजी जैसे संतों ने अपने सत्य और ओजस्वी वचनों और संदेशों के जरिए ऐसे प्रयासों को सफल नहीं होने दिया। उन्होंने अपनी सच्ची भक्ति से मन चंगा तो कठौती में गंगा जैसे विचारों को साकार करके दिखाया। डॉ. सर्वेशानंद ने जात-पांत पर प्रहार करते हुए गंगा स्नान के बिना जूता बनाकर भी भगवान की भक्ति प्राप्त की जा सकती है का उल्लेख कर रविदासजी की महिमा का बखान किया। उन्होंने मौजूदा दौर में जात-पात और पंथों के नाम पर फैल रही वैमनस्यता पर कविता के माध्यम से कुठाराघात किया। कहा मुल्क में नफरतों की घनी रात है, है मोहब्बत दफन ऐसे हालात हैं, मजहबों में शिखर पर लाने की दौड़ है, लड़ रहा धर्म है लड़ रही जात है। कार्यक्रम में डॉ. घनश्याम मिश्र, डॉ. मनीषा, डॉ. किशोरी लाल पांडेय, डॉ. अवधेश यादव, डॉ. मंजू देवी आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता डॉ. प्रभात वर्मा और संचालन डॉ. अमित गोयल ने किया।