ज्ञानपुर/ऊंज(भदोही)।
मानसून की बेरुखी के साथ बिजली की मनमानी कटौती से किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। बारिश न होने से सूख रही फसलों को बचाने की जुगत में लगे किसानों को बिजली धोखा दे रही है। ग्रामीण अंचलों में किस्तों में महज चार से पांच घंटे ही बिजली मिल रही है। इससे वह धान की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी धान की फसल बारिश की कमी और बिजली की कटौती के चलते हाथ से निकलते देख किसानों की पेशानी पर बल पड़ने लगा है।
बिजली आपूर्ति को लेकर शासन का आदेश है कि मुख्यालय को 24 घंटे, तहसील को 20 और ग्रामीण अंचलों को 18 घंटे बिजली दी जाए लेकिन नई सरकार बनने के बाद करीब पांच माह गुजर गए और यह रोस्टर अब तक पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सका। जिला मुख्यालय पर कभी-कभार तो बिजली मिल जाती है लेकिन ग्रामीण अंचलों में अघोषित कटौती के बीच किस्तों में आपूर्ति की जा रही है। इससे लोगों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। मानसून की बेरहमी से चिंतित किसान धान को बचाने के लिए नहर, नलकूप और पंपिग सेट का सहारा ले रहे हैं लेकिन बिजली न आने से वह भी नहीं चल पा रहे हैं। चौरी, औराई, सुरियावां, मोढ़, बाबूसराय, महराजगंज, डीघ, अभोली समेत अन्य स्थानों पर स्थित ग्रामीण फीडरों में आए दिन खामियों के चलते आपूर्ति सही तरीके से नहीं हो पा रही है। ऊंज संवाददाता के अनुसार, अकोढ़ा फीडर से गत एक माह से किस्तों में कट-कटकर मात्र चार घंटे बिजली मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली आने के बाद लोग धान की सिंचाई के लिए मशीन चलवाते हैं, लेकिन जब तक खेत में पानी पहुंचता है तो बिजली कट जाती है। कुछ घंटे बाद बिजली आने के बाद यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। एक बीघे खेत की सिंचाई तीन से चार दिन में भी नहीं हो पा रही है। कटौती से ऊंज, कुरमैचा, सीकीचौरा, भैरोपुर, चौराकला समेत 25 से अधिक गांव प्रभावित हैं। ग्रामीण मुन्नीलाल बिंद, करन कुमार ने जिला प्रशासन से आपूर्ति में सुधार करवाने की मांग की। अधिशासी अभियंता बिजली अमर सिंह ने कहा कि रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति का प्रयास किया जाता है। तकनीकी खामियों के कारण अक्सर ऐसी दिक्कत होती हैं।