भदोही। जुमेरात की शाम मोहर्रम के चांद का दीदार होते ही इस्लामिक कलेंडर का नया वर्ष (हिजरी 1439) शुक्रवार से शुरू हो गया। मुस्लिम समुदाय में नए हिजरी की बधाईयों का दौर शुरू हो गया। नववर्ष की बधाईयों के बीच ही लोगों में करबला के शहीदों की याद भी ताजा हो गई। दसवीं मोहर्रम को मनाए जाने वाले यौमे आशूरा की भी नगर में तैयारी शुरू हो गई।
इस्लामी कैलेंडर का आखरी महीना जिल हिज्ज होता है जिसमे बकराईद पड़ता है। नए वर्ष का आगाज होते ही करबला के शहीदों की याद जेहन में ताजा हो उठती हैं। नगर के आलिमों के अनुसार बारिश का मौसम होने से जुमेरात को चांद नहीं दिख सका था जिसको लेकर संशय की स्थिति थी। हलांकि जुमे को आलिमों ने दूसरे शहरों के आलिमों से वार्ता कर गुरुवार को ही चांद के दिदार होने की तस्दीक की। मदरसा शमसिया तेगिया के प्रिंसिपल मौलाना फैसल अशरफी और जामा मस्जिद तकिया कल्लन शाह के पेशइमाम हाफिज परवेज अच्छे ने साफ किया कि चांद जुमेरात को हुआ है उस लिहाज से यौमे आशूरा पहली अक्टूबर को मनाया जाएगा। आलिमों द्वारा चांद की तस्दीक करने के साथ ही मुस्लिम बाहुल्य मोहल्लों में हजरते इमाम हुसैन की चर्चा में लोग मशगूल हो गए। मोहल्लों में बने इमाम चौकों की साफ सफाई और रंग रोगन भी करा दिया गया। जुमे को दिन भर मुस्लिम समुदाय के लोग आपस में नए साल की बधाई देते रहे। हाफिज परवेज अच्छे ने कहा कि शहादत और सब्र वाले इस महीने में लोगों को इमाम हुसैन और उनके अहले खानदान की कुर्बानियों को याद करनी चाहिए। उनके नाम पर कुरआनख्वानी, फातेहा कराने के साथ गरीबों व मजबूरों की मदद करनी चाहिए।