ज्ञानपुर (भदोही)।
परिषदीय स्कूलों की बदहाली पर भले ही हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है, लेकिन सूबे के ज्यादातर प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय आज भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं। जिले में 1115 परिषदीय स्कूलों में करीब 600 के शौचालय अनुपयोगी हो चुकेे हैं। प्राथमिक विद्यालय में आज भी टाट-पट्टी पर ही पढ़ाई हो रही है।
देश की आजादी को करीब छह दशक से अधिक का समय गुजर गया है। प्राथमिक शिक्षा को बेहतर करने के लिए अब तक की सरकारों ने तमाम प्रयास किया लेकिन धरातल पर ज्यादा सुधार नहीं हो सका है। पेयजल, बिजली, पंखा, शौचालय की व्यवस्था सही करने के लिए लाखों रुपये खर्च हुए लेकिन ज्यादातर स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का हाल बदतर ही है। पानी की समुचित व्यवस्था न होने से स्कूलों में बने शौचालय ध्वस्त हो चुके हैं। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो ज्ञानपुर के करीब 50, भदोही के 70, औराई के 120, डीघ के 150, सुरियावां के 90, अभोली के 60 समेत करीब 600 स्कूलों का शौचालय बेकार हो चुका है। 100 से अधिक स्कूलों में हैंडपंप न होने से बच्चों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। विद्युतीकरण न होने से अधिकांश विद्यालय में गर्मी से बच्चों को परेशानी उठानी पड़ती है। स्थिति यह है कि गिने-चुने स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर विद्यालयों में अब भी टाट-पट्टी पर ही पढ़ाई हो रही है। न तो बिजली की व्यवस्था है न ही समुचित पेयजल की। इससे प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर नहीं सुधर पा रहा है।
कोट
शासन से मिले बजट के अनुसार स्कूलों में संसाधन की व्यवस्था की जा रही है। देखरेख न होने से शौचालय, हैंडपंप आदि बेकार हो जाते हैं। - प्रकाश नारायण श्रीवास्तव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी