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सरकारी कर्मी और लखपति को भी पीएम आवास

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ज्ञानपुर। आवास विहीन लोगों को पक्की छत मुहैया कराने की मुहिम जिले के नगरों में रास्ते से भटक चुकी है। जरूरतमंद दफ्तरों का चक्कर काट रहे, जबकि सरकारी कर्मी से लखपति पात्र बन कर आवास प्राप्त कर चुके हैं। विभागीय कर्मियों से तालमेल बैठा कर आवास आवंटन में व्यापक झोल किया जा रहा है। गाहे-बगाहे विरोध शुरू होता है, लेकिन कार्रवाई न होने से मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
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2014 में भाजपा की सरकार बनने के बाद ग्रामीण पीएम आवास की तरह नगरीय इलाकों में कच्चे एवं टीनशेड के घरों में रहने वालों को पक्का छत मुहैया कराने के लिए 2015-16 में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना लागू हुई। इसमें पात्रों को तीन किस्तों में ढाई लाख देने का प्राविधान है। चार साल में जिले के ज्ञानपुर, भदोही, गोपीगंज, सुरियावां, नई बाजार, घोसिया और खमरिया में आवास के लिए 20 हजार से अधिक ने आवेदन किया और उसमें 15 हजार 400 लाभार्थी चयनित हुए। लाभार्थियों के चयन में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी की गई। जिनके पास तीन मंजिला मकान है उन्हें और सरकारी कर्मचारी के घर में आवास आवंटित किया गया। सुरियावां, ज्ञानपुर, भदोही, घोसिया, खमरिया कमोबेश हर नगर में ऐसी स्थिति सामने आई। ज्ञानपुर के पुरानी बाजार, वार्ड नौ, वार्ड एक में आवंटन को लेकर शिकायतें आईं, लेकिन मामला लंबित है। परियोजना अधिकारी शैलेंद्र भूषण ने कहा कि 15 हजार 400 आवासों में 650 आवास ही पूर्ण हो चुके हैं। तीन हजार आवास कुछ दिन में ही पूरे हो जाएंगे। छह हजार का निर्माण शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि तीन लाख से कम आय वाले योजना के पात्र हैं। सरकारी कर्मी के घर में कोई बेरोजगार है या अलग रहता है तो वह पात्र है। 18 वर्ष से अधिक उम्र होने पर वह योजना का लाभ ले सकता है।
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