ज्ञानपुर। सूखे तालाब और पोखरों को पानी से भरने का सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह का आदेश जिले में प्रभावी होता नहीं दिख रहा है। 15 जून तक सभी तालाबों में पानी भरने का निर्देश दिया गया था, लेकिन अब भी जिले के ज्यादातर तालाबों में धूल उड़ रही है, हालांकि नहर विभाग की ओर से 11 जून को ही पंप कैनाल चालू किया गया है।
चटकती धूप एवं भीषण गर्मी में जिले के 90 फीसदी से अधिक तालाब, पोखरे, नहर आदि सूख चुके हैं। इससे पशु-पक्षियों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। जिसको देखते हुए पिछले दिनों सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने सभी जिले के आला अधिकारियों को निर्देश दिया था कि 15 जून तक तालाबों को पानी से भर दिया जाए लेकिन अब भी तालाबों में धूल उड़ रही है। तीनों तहसीलों में आंकड़ों के मुताबिक तीन हजार से अधिक सामान्य और मॉडल तालाब हैं। कुछ गिने-चुने तालाबों में भले ही पानी दिख जाए लेकिन हकीकत में अधिकतर तालाब सूखे पड़े हैं। जिन तालाबों में पानी की लहरें उठनीं चाहिए, वहां धूल उड़ रही है। तपती धूप में बदन झुलसने और गला सूखने पर जब पशु-पक्षी तालाबों का रुख करते हैं तो सूखे पड़े तालाब देख मायूस होते हैं। इस गंभीर समस्या से पशुपालकों को भी जूझना पड़ रहा है। पशुपालक अपने जानवरों की प्यास बुझाने के लिए हैंडपंप का सहारा ले रहे हैं। मनरेगा से खुदे 565 से अधिक तालाबों को संरक्षित एवं सुरक्षित रखने की मुहिम भी कागजों तक सीमित है। अधिशासी अभियंता नहर केएन जायसवाल ने कहा कि तालाबों में पानी भरने के लिए पंप कैनाल को 11 जून को ही चालू किया गया है। नहर और माइनर के माध्यम से तालाबों में पानी भरना है। अपर जिलाधिकारी राम सिंह वर्मा ने कहा कि नहरों में पानी आ चुका है। ग्राम प्रधान माइनर और नहर के माध्यम से तालाबों में पानी भर दें, जिससे मवेशियों को सहूलियत हो सके। उन्होंने कहा कि जिन गावों के तालाब सूखे रहेंगे वहां के प्रधानों पर कार्रवाई तय की जाएगी।