ज्ञानपुर। धान की रोपाई की तैयारी किसानों ने शुरू कर दी है, लेकिन आने वाले दिनों में सरकारी बीज के लिए किसानों को दर-दर भटकना पड़ेगा। सहकारी समितियों पर अब तक बीज नदारद है, जबकि कृषि विभाग की ओर से 70 एमटी अनुदानित बीज कृषि बीज भंडारों पर मंगाया है, जो कि ऊंट के मुंह में जीरा मानी जा रही है। एआर को-आपरेटिव की ओर से 100 क्विंटल बीज की डिमांड की गई है, लेकिन वह कब आएगी इसके बारे में कुछ स्पष्ट नहीं हो पाया है।
सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य तय कर काम कर रही है, लेकिन अफसर उसको लेकर संजीदा नहीं है। रबी सीजन खत्म होने के बाद किसान करीब दो महीने के बाद अब खरीफ सीजन की तैयारी में लग गए हैं। धान की रोपाई से पूर्व नर्सरी डालने के लिए खेतों की जुताई आदि की जा रही है। जिले में करीब 30 हजार हेक्टेयर धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया है जबकि 1600 हेक्टेयर में धान की नर्सरी डाली जानी है। भीषण गर्मी और उमस के चलते किसान विलंब से नर्सरी डालेंगे, लेकिन बड़ी संख्या में किसान जून के पहले सप्ताह से धान की नर्सरी डालना शुरू कर चुके हैं लेकिन उन्हें समितियों पर सरकारी बीज नहीं मिल पा रही है। इससे उनको निजी दुकानों से महंगे दामों पर बीज को खरीदना पड़ रहा है। इसको लेकर किसानों में गहरी नाराजगी है। किसान भोलानाथ उपाध्याय ने कहा कि सरकारी विभागों की ओर से किसानों को समय से कोई सुविधा नहीं उपलब्ध कराई जाती। खाद की जरूरत के समय खाद तो बुआई के समय बीज भी समय नहीं नहीं मिल पाता। जिससे किसानों को काफी पैसे निजी दुकानदारों को देना पड़ता है। एआर को-आपरेटिव रवींद्र कुमार मिश्र ने कहा कि सहकारी समितियों से बीज का वितरण कम होता है। इससे यहां पर कम मात्रा में ही मंगाया जाता है। वर्तमान में जिले के समितियों पर बीज नहीं है। इसके लिए मांग की गई है। वहीं कृषि विभाग की ओर से विभिन्न प्रजातियों की करीब 70 एमटी बीज कृषि बीज भंडारों पर मंगाया गया है। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि कृषि बीज भंडारों पर बीज उपलब्ध है। 70 एमटी के अलावा 100 एमटी के करीब और डिमांड की गई है। एक सप्ताह के अंदर वह भी जिले में आ जाएगी।