ज्ञानपुर। 100 दिन के रोजगार की गारंटी वाली योजना मनरेगा की भदोही जिले में हालत खराब है। जिले के 275 गांवों में मनरेगा के तहत होने वाले कार्य ठप पड़ गए हैं। इससे विकास कार्य जहां बाधित हो गए हैं, वहीं दो जून की रोटी के लिए मजदूर भी परेशान हैं। मामला संज्ञान में आने पर सीडीओ ने सभी बीडीओ को नोटिस जारी कर काम में तेजी लाने का निर्देश दिया है। मनरेगा के तहत सड़क, खड़ंजा, तालाब खोदाई आदि कार्य होता है।
मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए कांग्रेस सरकार की मनरेगा योजना वर्ष 2008 से जिले में प्रभावी हुई। शुरुआती दौर में तालाबों के सुंदरीकरण से लेकर अन्य काम तेजी से कराए गए, लेकिन समय के साथ ही विकास के दूसरे काम को भी इसी से जोड़ दिए गए। प्रधानमंत्री आवास, खड़ंजा, संपर्क मार्गों की पटरियों, पौधरोपण से लेकर अन्य दूसरे कार्यों को भी मनरेगा से जोड़ दिया गया। इससे योजना गति पकड़ने की बजाए अपने ट्रैक से भटक गई। स्थिति यह हो गई है कि जिले में मजदूरों को 100 दिन काम नसीब नहीं हो पा रहा है। अधिसंख्य श्रमिक काम ढूंढ़ने के लिए जगह-जगह चक्कर लगा रहे हैं। कई गांवों में रोजगार की मांग बढ़ गई है, लेकिन बिना काम किए मस्टर रोल तैयार करने की जुगत में लगे प्रधान और सचिव अब तक लेखाजोखा भी प्रस्तुत नहीं कर सके। इससे जिले की 561 ग्राम पंचायतों में केवल 286 में मनरेगा से कोई न कोई काम हो रहा है, जबकि 275 गांवों के मजदूर परेशान हैं। आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो जिले की 561 ग्राम पंचायतों में पंजीकृत एक लाख 19 हजार जॉबकार्ड धारकों में 49 हजार 726 सक्रिय हैं। वित्तीय वर्ष 2018-19 में सक्रिय मजदूरों में किसी को 10 दिन, किसी को 40 दिन और किसी को 50 दिन ही काम मिल सका है। 100 दिन काम पाने वालों में महज तीन से चार हजार मनरेगा मजदूर शामिल रहे। कहा जा रहा है कि काम करने की प्रगति यही रही तो 15 लाख मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य भी पूरा हो पाना मुश्किल हो जाएगा। श्रमायुक्त मनरेगा सुनील तिवारी ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में 15 लाख दो हजार मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 275 गांवों में काम शुरू न होने से मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से जिले के सभी छह बीडीओ को नोटिस जारी कर काम में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है। एक सप्ताह के अंदर काम शुरू न होने पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई तय की जाएगी।