ज्ञानपुर। मानसून आने से पहले जिले में अधूरे 498 प्रधानमंत्री आवास को पूर्ण कराना प्रशासन के लिए चुनौती होगा। समय रहते आवास पूर्ण नहीं हुए तो लाभार्थियों की मुश्किलें बढ़ जाएगी। प्रधान, सेक्रेटरी और बैंक कर्मियों की उदासीनता पात्र लाभार्थियों की उम्मीदों पर कुठाराघात कर रही है। तीन वित्तीय वर्ष में स्वीकृत साढ़े 11 हजार आवासों में 90 फीसदी तो पूर्ण हो चुके हैं लेकिन जो अधूरे हैं उसे पूर्ण करना किसी चुनौती से कम नहीं है।
केंद्र सरकार की ओर से गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2016-17 में पांच हजार 981 और 2017-18 में चार हजार 560 और 2018-19 में करीब 2248 आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया। तीन वित्तीय वर्ष में करीब 11 हजार 500 आवासों में 10 हजार 400 के करीब पूर्ण हो गए लेकिन 1100 आवास अब भी अधूरे है। प्रशासनिक आंकड़ों में करीब 150 आवास पहले सत्र तो 150 आवास दूसरे सत्र में अधूरे रह गए। इसी तरह 2018-19 में भी 100 से अधिक आवास पूरे नहीं हो सके जबकि हकीकत इससे कहीं जुदा है। प्रधान और सेक्रेटरी की ठेकेदारी संग बैंकों की उदासीनता भी लाभार्थियों के आवास को पूर्ण नहीं करा सकी। 20 जून के बाद मानसून की दस्तक भी हो जाएगी ऐसे में छप्पर या कच्चे घर को तोड़ कर प्रधानमंत्री आवास बना रहे लाभार्थियों को बारिश की रात गुजार पाना मुश्किल हो जाएगा। या तो वे पड़ोसियों के सहारे बारिश सीजन गुजारेंगे या तिरपाल आदि डाल कर रहेंगे, हालांकि प्रशासन का दावा है कि बारिश से पहले सभी आवास पूर्ण करा लिया जाएगा।