ज्ञानपुर। खतरनाक रसायनों के ज्यादा उपयोग से जिले में मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म हो रही है। मिट्टी में जीवांश कार्बन के साथ सल्फर समेत अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी बढ़ती ही जा रही है। मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाएं भी खास परिवर्तन नहीं ला पा सकीं। समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो खेती लायक भूमि का रकबा घट जाएगा।
मिट्टी की सेहत के प्रति किसानों को जागरूक बनाने के मकसद से मृदा हेल्थ कार्ड स्कीम चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत किसानों को हेल्थ कार्ड वितरित किया गया है। इसमें मिट्टी में पाए जाने वाले 16 पोषक तत्वों की मात्रा और उसे बढ़ाने की तरकीब बताई जाती है। मानव शरीर की तरह मिट्टी में भी पोषक तत्वों की जरूरत होती है। उनकी कमी से फसलों में तमाम प्रकार की बीमारी होने के साथ ही पैदावार भी प्रभावित होती है। घरांव स्थित मृदा प्रयोगशाला के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले की मिट्टी में जीवाश्म कार्बन की भारी कमी हो गई हैै। जीवाश्म कार्बन मिट्टी के लिए वही भूमिका निभाता है, जो मानव शरीर में खून। इसकी कमी से नाइट्रोजन, पोटैशियम, सल्फर, मैगनीज, बोरान जैसे 16 पोषक तत्व कम होने लगते हैं। स्वस्थ मिट्टी में जीवाश्म कार्बन 0.8 पीपीएम से अधिक होना चाहिए। इस समय यह केवल 0.2 पीपीएम है। इसी तरह आयरन, नाइट्रोजन, फास्फोरस का स्तर भी बेहद कम है। इसमें जीवाश्म कार्बन के अति न्यून स्तर के अलावा फास्फेट, सल्फर एवं जिंक की मात्रा भी कम पाई गई है। इसके अतिरिक्त लोहा, मैगनीज और बोरान कहीं कम तो कहीं मध्यम स्तर पर पाए गए हैं। कृषि विभाग की ओर से एक लाख 87 हजार मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया गया है।