ज्ञानपुर/ऊंज। भीषण गर्मी ने आम लोगों के साथ-साथ दुधारू पशुओं को भी प्रभावित किया है। गर्मी बढ़ने के साथ ही जिले में दूध की किल्लत बढ़ने लगी है। जिले में करीब 25 से 35 फीसदी तक दुग्ध उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई। इससे दूध का बाजार उबलने लगा है। दूध की आमद कम होने के कारण भाव बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को दूध 46 से 48 रुपये लीटर तक बिका। अमूल का दाम बढ़ने के कारण दूधिए भी भाव को चढ़ा दिए हैं।
17 लाख की आबादी वाले जिले में हर रोज करीब चार लाख 50 हजार लीटर दूध की जरूरत होती है। इसके मुकाबले बारिश और ठंड के सीजन में करीब 4.20 लाख लीटर दूध की आवक होती है। जरूरत और आवक के बीच मामूली अंतर होने से उसकी जरूरत निजी दुकानों से खरीद कर ली जाती है, लेकिन भीषण गर्मी शुरू होते ही पशुओं का दुग्ध उत्पादन काफी कम हो गया है। 25 से 35 फीसदी तक दूध उत्पादन में गिरावट हो चुकी है। इससे 4.20 लाख के बजाए 3.20 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो पा रहा है। एक लाख 30 हजार लीटर की भरपाई करने के लिए मिलावट का कारोबार भी तेजी से चल रहा है। रसायन मिला कर तैयार होने वाले दूध से लोगों को बीमार होने का खतरा भी बढ़ जाता है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में कुल तीन लाख 54 हजार 497 गाय और भैंसें हैं। इनमें गाय दो लाख नौ हजार जबकि भैंस एक लाख 44 हजार हैं। इसमें 50 हजार गाय और 70 हजार भैंस दूध दे रही है। अंतर एक लाख से अधिक होने से दूध की मांग पूरी नहीं हो पा रही है। तमाम पशु पालक इस कमी का फायदा भी उठा रहे हैं। दूध के दाम पिछले चार से पांच रुपये तक बढ़ गए हैं। पहले जहां दूध 40-45 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, वहीं अब यह कीमत 46-50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। पशुपालक भोले उपाध्याय और अनुज कुमार का कहना है कि दुग्ध उत्पादन में कमी आई है, जबकि पशु पालन का खर्चा उतना ही है। ऐसे में दूध के दाम बढ़ाना मजबूरी है। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जेडी सिंह ने कहा कि गर्मी के मौसम में हरे चारे की कमी हो जाती है। इसके अभाव में पशुओं में दुग्ध उत्पादन घट जाता है। वहीं शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में पशुओं की ऊर्जा नष्ट होती है, जिसका असर भी दुग्ध उत्पादन पर पड़ता है।