औराई। भदोही लोकसभा सीट जीत कर भाजपा ने भले ही अपनी मौजूदगी बरकरार रखी हो, लेकिन नवनिर्वाचित सांसद रमेशचंद्र बिंद के समक्ष चुनौतियों की कमी नहीं है। चीनी मिल को दोबारा चालू कराने, माधोसिंह, सुरियावां में अहम ट्रेनों के ठहराव से लेकर कई अहम समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। तमाम अधूरे पड़े विकास कार्यों को पूर्ण करना भी अहम है।
मखमली कालीनों के लिए विश्व प्रसिद्ध कालीन नगरी भदोही में चुनावी सीजन में नेताओं की ओर से वादे तो कर दिए जाते हैं पर जीत के बाद उस पर अमल नहीं किया जाता। 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी की सुनामी में भदोही की सीट भाजपा ने बचा लिया। नव निर्वाचित सांसद रमेशचंद्र बिंद के सामने कई समस्याएं सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी हैं। चाहे वह डेढ़ दशक से बंद पड़ी औराई चीनी मिल हो या किसी जमाने में जंक्शन कहे जाने वाले माधोसिंह रेलवे स्टेशन पर लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव का मामला हो। औराई चीनी मिल के कल पुर्जे जंग की भेंट चढ़ रहे हैं। गन्ने का अच्छा उत्पादन कर मुनाफा कमाने वाले किसान बेरोजगार हैं। चीनी मिल चलने से किसान गन्ने की अच्छी पैदावार कर एक मुश्त पैसा पाकर अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई और शादी विवाह में खर्च करते थे। माधोसिंह रेलवे स्टेशन जो किसी जमाने में जंक्शन रहा करता था पर अब लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव नहीं होता। ट्रेनों का ठहराव न होने से स्टेशन का अस्तित्व ही समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। चुनाव के कुछ दिन पहले औराई चौराहे पर पिलरयुक्त फ्लाईओवर बनाने के लिए लोगों ने सांसद वीरेंद्र सिंह से मुलाकात की थी। उन्होंने आश्वासन दिया लेकिन वह बलिया चले गए। अब देखना है भाजपा की सीट बरकरार रखने वाले रमेश बिंद भी पूर्व के सांसदों और विधायकों की तरह हैंडपाइप, सोलर लाइट और कुछ चुनिंदा सड़कों तक ही सीमित रह जाते हैं या कुछ और आगे जाएंगे।