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खर्च हुए सात लाख, 1.23 फीसदी बढ़ सका वोट- प्लानिंग

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ज्ञानपुर। भारत निर्वाचन आयोग मतदान प्रतिशत को बढ़ाने के लिए भले ही करोड़ो रुपये खर्च करती है, लेकिन उसका असर वोट प्रतिशत पर नहीं दिखता। भदोही सीट पर करीब सात से आठ लाख रुपये खर्च हुए पर मतदान प्रतिशत में 1.23 फीसदी की बढ़ोतरी ही हो सकी। वर्ष 2014 में 53. 54 तो 2019 में 54.77 फीसदी ही वोट मिल सका। जानकारों की राय है कि 44 से 45 डिग्री का तापमान होने से वोटर घर से उम्मीद के मुताबिक नहीं निकलते।
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लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से करीब छह -सात माह पूर्व से ही आयोग के निर्देश पर जिले में जागरूकता रैली, गोष्ठी समेत अन्य आयोजन किये गए । जिसमें लोगों से अधिक मतदान के प्रति प्रेरित किया गया। दो एलईडी वैन जहां एक महीने तक गांव-गांव जाकर लोगों को बूथों तक पहुंचने का अलख जगाया तो तो गोष्ठी, बैठकों में अफसरों से लेकर छात्र- छात्राओं ने अधिक मतदान पर जोर दिया। प्रशासन की ओर से कम से कम 70 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन 12 मई को यह आंकड़ा 54.77 पर ही सिमट गया। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो निर्वाचन विभाग ने दो एलईडी वैन पर करीब छह लाख 50 हजार और अन्य कार्यक्रमों पर एक से डेढ़ लाख खर्च किया, लेकिन उसका असर मतदान के दिन नहीं देखने को मिला। 2009 में मात्र 43.39 फीसदी मतदान हुआ, जबकि 2014 में 53.54 फीसदी वोट पड़े। वर्ष 2019 में मतदान प्रतिशत 54.76 के साथ ही 1.23 फीसदी बढ़ा जरूरी पर आयोग और प्रशासन की उम्मीद के हिसाब से नहीं रहा। राजनीतिक जानकार पीएन शुक्ला की मानें तो मई की 44- 45 डिग्री के तापमान में वोटर बूथों तक पहुंचने में सकुचाए। ठंड के मौसम में मतदान होता तो यह आंकड़ा 65 फीसदी के आसपास होता। उप जिला निर्वाचन अधिकारी राम सिंह वर्मा ने कहा कि प्रचार-प्रसार में करीब सात से आठ लाख खर्च हुए, हालांकि उम्मीद के हिसाब से मतदान नहीं रहा।
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