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मोदी मैजिक के सहारे पार हुई रमेश की नैया

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ज्ञानपुर। मखमली कालीनों के लिए विश्व प्रसिद्ध भदोही की सीट पर लहर में ही भाजपा को जीत नसीब हो सकी। 1991 में राम लहर, 1998 में अटल, 2014 में मोदी लहर के बाद फिर 2019 में मोदी लहर में रमेेश बिंद ने जीत दर्ज की। मोदी मैजिक के आगे सपा-बसपा गठबंधन का जातीय समीकरण भी बेअसर हो गया।
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1947 में आजादी मिलने के बाद पहला आम चुनाव 1951-52 में हुआ। भदोही और मिर्जापुर से जुड़कर बने संसदीय सीट पर अस्सी के दशक तक कांग्रेस लगातार जीत दर्ज करती रही। कांग्रेस के विपक्ष में जनसंघ का गठन तो हुआ, लेकिन वह भी करिश्मा नहीं कर सकी। 90 के दशक में सपा और उसके बाद बसपा अस्तित्व में आई तो कांग्रेस का किला धीरे-धीरे कमजोर होने लगा। 1990 से लेकर 2014 तक हुए लोकसभा चुनाव एवं उप चुनाव में तीन बार बसपा और तीन बार सपा ने जीत दर्ज की। सपा-बसपा के जातीय वोटों के चलते भाजपा की स्थिति ठीक नहीं रही हालांकि जब भी जीत मिली तो वह लहर के सहारे। 1991-92 में रामलहर में वीरेंद्र सिंह, 1998 में अटल लहर में वीरेंद्र सिंह और 2014 में मोदी लहर में भी वीरेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की। 2019 में एक बार फिर मोदी लहर चली और भाजपा के रमेश चंद्र बिंद विजेता बने। भदोही सीट पर पहली बार भाजपा लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। इसके पूर्व कांग्रेस अस्सी के दशक में दो तो बसपा ने 2004 के आम चुनाव, 2007 के उप चुनाव, 2009 के आम चुनाव में लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी।
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