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भदोही सीट पर पहली बार विजेता को मिले पांच लाख मत

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ज्ञानपुर। मखमली कालीनों के लिए विश्व प्रसिद्ध कालीन नगरी में 69 साल के इतिहास में पहली बार किसी विजेता को पांच लाख से अधिक मत मिले। 2014 में चार लाख मत पाकर वीरेंद्र सिंह तो 2009 में एक लाख 95 हजार मत के सहारे गोरखनाथ पांडेय सदन की सीढ़ियों तक पहुंचे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 50 फीसदी वोट मिलने का दावा भी सच होता दिखा। यहां भाजपा प्रत्याशी को अकेले 49.07 फीसदी (लगभग आधा) मत मिले, जबकि शेष मतों में गठबंधन से लेकर अन्य उम्मीदवार शामिल रहे।
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आजादी के बाद 1951-52 में भदोही-मिर्जापुर संसदीय सीट के लिए चुनाव हुए। जिसमें कांग्रेस के जान ए विल्सन ने जीत दर्ज की। वह दूसरी बार 1957 से 1962 तक सांसद रहे। 1990 से लेकर 2009 तक के चुनावों में विजेता दो से ढाई लाख और रनरअप भी उसी के आसपास ही रहते थे। 2009 में परिसीमन के बाद पहली बार भदोही सीट अस्तित्व में आई। पहले चुनाव में सबसे खराब वोटिंग हुई। मात्र 43 फीसदी मत उस दौरान पड़े थे। पहले चुनाव में बसपा के गोरखनाथ पांडेय एक लाख 95 हजार मत पाए, जबकि रनरअप छोटे लाल बिंद को एक लाख 82 हजार वोट मिला। 2014 के मोदी लहर में भी भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह चार लाख तीन हजार मत पाए थे जबकि बसपा प्रत्याशी राकेश धर त्रिपाठी दो लाख 44 हजार और सपा की सीमा मिश्रा दो लाख 38 हजार वोट पाईं थी। 2019 के चुनाव में गठबंधन और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला रहा। मतदाता भी या तो भाजपा की तरफ गए या गठबंधन की ओर। विजेता रमेश बिंद जहां पांच लाख 10 हजार मत पाए तो गठबंधन के रंगनाथ मिश्र को चार लाख 66 हजार वोट मिला। भाजपा को 49.07 तो गठबंधन को 44.87 प्रतिशत मत मिले। दोनों को छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस भी 2.46 फीसदी मत पा सकी। नौ छोटे दल और निर्दल उम्मीदवार तो 0.5 फीसदी के आंकड़े को नहीं छू सके।
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