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ड्यूटी ड्राबैक (संशोधित)

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भदोही। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने कालीन उद्यमियों को निर्यात पर मिलने वाले ड्यूटी ड्रॉ-बैक की दरों में वृद्धि कर उद्योग को राहत प्रदान की है। हस्तनिर्मित ऊनी कालीनों पर ड्रॉ-बैक प्रतिशत यथावत रखते हुए उस पर लगी अधिकतम 303.20 रुपये की कैपिंग को बढ़ाकर 394 रुपये कर दिया है। 15 प्रतिशत से अधिक सिल्क लगे कालीनों की ड्राबैक प्रतिशत भी यथावत रहेगी, लेकिन कैपिंग 492.70 से बढ़ा 1107 रुपये कर दिया है। 19 दिसंबर से लागू होने वाली नई अधिसूचना में हैंड टफ्टेड कालीनों पर अब 3.1 प्रतिशत के बजाए 4.6 प्रतिशत ड्रॉबैक मिलेगा, जबकि कैपिंग को 96 रुपये से बढ़ाकर 114 रुपये कर दिया गया है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने नई दरों को उद्योग के लिए संजीवनी बताया है।
मंत्रालय से जारी अधिसूचना की जानकारी देते हुए परिषद के चेयरमैन महावीर प्रताप उर्फ राजा शर्मा ने बताया कि सिल्क कालीनों पर अब तक नौ प्रतिशत ड्रॉ-बैक को 14.9 प्रतिशत कर दिया गया है। अधिकतम कैपिंग को भी 3490.70 से बढ़ाकर 7205 कर दिया गया है। मानव निर्मित धागों से बने कालीनों पर ड्रॉ-बैक पूर्व की भांति 1.70 प्रतिशत ही मिलेगा, लेकिन कैपिंग को हटा लिया गया है जिससे लोगों को फायदा होगा। चेयरमैन ने बताया कि अब तक हस्तनिर्मित ऊनी दरियों पर 1.50 प्रतिशत ड्राबैक को 3.7 प्रतिशत करते हुए कैपिंग 19.70 रुपये से बढ़ाकर 70 रुपये कर दिया गया है। उधर हलांकि कालीन निर्यातक इम्तीयाज अंसारी व शमीम अंसारी ने कहा है कि भदोही परिक्षेत्र से निर्यात होने वाले मुख्य उत्पादों पर ड्राबैक सरकार ने घटा दी है। जिससे दिक्कत बढ़ेगी।
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सीईपीसी ने नई दरों का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय हाल ही में भदोही को घोषित किए गए टाऊन आफ एक्सपोर्ट एक्सेलेंस से जोड़ कर देख रहे हैं, जिसमें सरकार का इंड्रस्ट्री का बेड़ा पार करने का संकल्प दिखाई पड़ता है। उधर नई दरों के बारे में जानकारी होते ही कालीन उद्योग में खुशी की लहर दौड़ गई। सीईपीसी सदस्यों ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि इससे काफी हद तक बढ़े कास्ट और महंगाई से जूझने में सफलता मिलेगी। प्रथम उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह, परिषद के उपनिदेशक विजय कुमार सिन्हा ने आदि ने इस निर्णय को उद्योग के लिए संजीवनी बताया है।
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